सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) भारत में प्रवेश एवं भर्ती परीक्षाओं में सुधार के अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे पर युवाओं को संगठित कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का स्वागत करती है। पार्टी NEET, CBSE बोर्ड परीक्षाओं और CUET जैसी हालिया परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक, मूल्यांकन में गलतियाँ तथा कुप्रबंधन के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की CJP की मांगों का समर्थन करती है। साथ ही, वह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का भी समर्थन करती है।
यद्यपि इस आंदोलन की तत्काल प्रेरणा न्यायमूर्ति सूर्यकांत की असंवेदनशील और अस्वीकार्य टिप्पणियों से मिली, परंतु यह अंततः भारत के युवाओं के लंबे समय से चले आ रहे असंतोष और निराशा की अभिव्यक्ति है। हमारी जर्जर शिक्षा व्यवस्था, बढ़ती बेरोज़गारी और लगातार बढ़ती महंगाई के कारण उनकी आशाओं और आकांक्षाओं को बार-बार आघात पहुँचा है। इसके अतिरिक्त, युवा वर्ग हिंदुत्व की राजनीति से भी तेजी से मोहभंग का अनुभव कर रहा है, क्योंकि वह समझ रहा है कि यह राजनीति विभाजन और घृणा को बढ़ावा देने पर निर्भर करती है, जबकि देश की वास्तविक समस्याओं को न तो पर्याप्त रूप से स्वीकार किया जाता है और न ही उनका समाधान किया जाता है।
हाल के वर्षों में, अनेक असहमतिपूर्ण आवाज़ों को सरकार और उसके समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया प्रतिबंधों, उत्पीड़न और हमलों, झूठे आरोपों में कारावास तथा निर्वासन जैसे तरीकों से दबाया गया है। ऐसे माहौल में CJP के प्रदर्शनकारियों का साहस उल्लेखनीय है। अभिजीत दिपके का निर्भीक नेतृत्व प्रशंसनीय है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर की गई एक साधारण पोस्ट से शुरू हुए इस आंदोलन की जिम्मेदारी संभालने के लिए तुरंत अमेरिका से भारत की यात्रा की। प्रदर्शनकारियों द्वारा अहिंसक तरीकों पर दिया गया ज़ोर, तथा संविधान के आदर्शों और डॉ. आंबेडकर के विचारों को केंद्र में रखना भी सराहनीय है।
SP(I) आशा करती है कि अब तक प्राप्त उपलब्धियों को और सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि भारत के सभी युवाओं—विशेषकर सबसे अधिक वंचित वर्गों—के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक पूर्ण विकसित राजनीतिक आंदोलन उभर सके। यदि वर्तमान सरकार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और हिंदुत्व की विचारधारा को पराजित करना है, तो एक मजबूत वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति का निर्माण आवश्यक है। इसके लिए CJP को न केवल अपनी राजनीतिक स्थिति को अधिक स्पष्ट और व्यापक रूप से प्रस्तुत करना होगा तथा अपनी संख्या और संगठनात्मक क्षमता का विस्तार करना होगा, बल्कि उन अन्य समान विचारधारा वाले समूहों और आंदोलनों के साथ भी तालमेल स्थापित करना होगा जो भारत के लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा के लिए संघर्षरत हैं। उसे ऐसे साझा मंच के निर्माण का प्रयास करना चाहिए, जिसके आधार पर भाजपा-विरोधी व्यापक संघर्ष चलाया जा सके और जिसकी दृष्टि वर्ष 2029 के आम चुनावों पर केंद्रित हो।
मीर शाहिद सलीम (Ph: 9622002001)
उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)


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