IIT, कानपुर से उजाड़े गए धोबी परिवारों के साथ एकजुटता हेतु, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का IIT मुख्य गेट पर एक दिवसीय अनशन

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से उजाड़े गए धोबी परिवारों के साथ एकजुटता हेतु आज 25 मार्च, 2025, मंगलवार को मुख्य गेट , IIT कानपुर, कल्याणपुर में आज एक दिवसीय अनशन/धरना किया गया।

धरने में वरिष्ठ समाजसेवी और सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के महासचिव संदीप पांडे, विजया दीदी, मोना सूर, मीनू सूर, विजय चावला, सुरेश यादव, प्रताप साहनी, अनिल मिश्रा, के एम भाई, मीनाक्षी सिंह, शंकर सिंह, सलीम भाई, एडोवेकेट असित सिंह और शहर के अन्य तमाम समाजसेवी, श्रम संगठनों के साथी शामिल हुए। आईआईटी कानपुर के डिप्टी रजिस्टर मनोज दिवाकर ने आईआईटी प्रतिनिधि के रूप में आकर ज्ञापन लिया।

अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर, दावा कर सकता है कि उसका परिसर खुले में शौच से मुक्त हो गया है। क्योंकि 32 धोबी परिवार जिनके पास शौचालय नहीं थे उन्हें ही उजाड़ दिया गया है। भारतीय जनता पार्टी के शासन में इसमें कुछ भी नया नहीं है। प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने के लिए अपराधियों, भले ही उनका जुर्म अभी न्यायालय में साबित न हुआ हो, को गोली मार कर खत्म कर देना। लेकिन, भाजपा के जुड़े अपराधियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों का वापस लेकर या जमानत, पैरोल देकर उनको सांसद, मत्री बना कर उन्हें माननीय का दर्जा दे देना। चुनाव में भ्रष्टाचार खत्म करने कि लिए चुनावी बांड योजना लायी गई थी, जिसपर फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई है, जिसके तहत देशी-विदेशी कम्पनियां अपने चहेते राजनीतिक दल को गोपनीय रूप से कितना भी चंदा दे सकती थीं। पहले सरकारी कार्यालयों में जो काम कराने के लिए रु. 50 घूस देनी पड़ती होगी वह काम आज बाहर साइबर कैफे वाले रु. 100 या ज्यादा लेकर करें तो वह भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं आता। भारतीय रेल में वातानुकूलित डिब्बे बढ़ाए जा रहे हैं, वंदे भारत में तो सभी डिब्बे वातानुकूलित है, स्लीपर व सामान्य श्रेणी के डिब्बे कम किए जा रहे हैं। जब सामान्य श्रेणी खत्म कर दी जाएगी या सारे डिब्बे वातानुकूलित हो जाएंगे और गरीब इंसान रेल की यात्रा ही नहीं कर पाएगा तो हम कह पाएंगे कि भारत विकसित हो गया।

महात्मा गांधी ने कहा था कि यातायात मनुष्य की आवश्यकता है, उसकी प्रगति नहीं। कपड़ा हम हाथ का बना भी पहन सकते हैं और मशीन का बना भी किंतु मशीन हमेशा बेरोजगारी बढ़ाती है। कपड़ा हम धोबी से घुलवा सकते हैं या मशीन से भी अगर मशीन लगाएंगे तो धोबी परिवारों को उजाड़ना होगा। तो आप तय करें कैसा विकास चाहिए? कम्पनियों का फायदा बढ़ा कर मनुष्य की आजीविका व जीवन खत्म करने वाला या रोजगार व सभी के लिए सम्पन्नता बढाने वाला ?

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर आज तक ऐसी सस्ती व उपयोग में सरल मशीन नहीं बना सका जिससे सीवर व सेप्टिक टैंकों में घुसकर सफाई करने वालों की मौतों को रोका जा सके । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के कानपुर में बनने से पहले कानपुर एक जीवंत औद्योगिक नगरी माना जाता था। संस्थान की स्थापना के बाद कानपुर के कपड़ा कारखाने एक एक करके बंद हो गए और अन्य उद्योग भी मर गए। कानपुर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान होने का क्या फायदा है? इसने इस देश के आम इंसान से ज्यादा अमरीका की सेवा की है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान को बंद कर आज से 65 साल पहले क्रिसानों से बिना उनको जमीन का मुआवजा दिए जो जमीन ली गई थी उसे किसानों को वापस करना ही उचित होगा।

सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया)

शंकर सिंह, जिला अध्यक्ष, 6306714614, मीनाक्षी मार्टिन सिंह, राज्य महासचिव, 9336188033, के.एम यादव, राज्य सचिव व समन्वयक, मानवाधिकार प्रकोष्ठ, 7985181117, संदीप पाण्डेय, राष्ट्रीय महासचिव.


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