भविष्य के धार्मिक स्थलों का नमूना होगा अयोध्या का प्रस्तावित सर्व धर्म सद्भाव केन्द्र

भारत सरकार के भूतपूर्व कैबिनेट सचिव स्व. जफर सैफुल्लाह की पहल पर स्थापित सर्व धर्म सद्भाव केन्द्र न्यास अयोध्या में एक सर्व धर्म सद्भाव केन्द्र का सृजन करेगा जिसमें दुनिया के किसी भी विचार को मानने वाले, यहां तक कि नास्तिक, का भी स्वागत रहेगा। इस केन्द्र का स्थल अयोध्या में राम जानकी मंदिर, सरयू कुंज, दुराही कुआं होगा। इस मंदिर के महंत आचार्य युगल किशोर शरण शास्त्री उपर्युक्त न्यास के दूसरे न्यासी हैं।

अयोध्या में इस तरह के एक सर्व धर्म सद्भाव केन्द्र की कल्पना इसलिए की जा रही है क्योंकि अयोध्या भगवान राम की जन्म स्थली और उनकी राजधानी होने के कारण हिन्दुओं के लिए एक पवित्र स्थान होने के साथ-साथ कम से कम चार अन्य धर्मों – बौध, जैन, इस्लाम व सिक्ख – के लिए भी पवित्र स्थली रहा है। गौतम बुद्ध ने यहां चार वर्षाकाल, जो प्रत्येक लगभग चार माह अवधि का रहा, बिताए। इस तरह उनका कुल अयोध्या प्रवास लगभग सोलह माह का रहा। ऐसा माना जाता है है कि जैन धर्म के चैबीस तीर्थंकरों में से चार का जन्म अयोध्या में हुआ जिनमें से एक सबसे पहले तीर्थंकर ऋषभदेव की मूर्ति यहां विद्यमान है। इस्लाम धर्म के दो पैगम्बरों, हजरत नूह अल्हे सलाम व हजरत शीश अल्हे सलाम की मजारें यहां स्थित हैं। इनकी व अन्य कई सूफी संतों की मजारों के यहां स्थित होने के कारण अयोध्या को खुर्द मक्का भी कहा जाता है। कई मुसलमानों को मरने के बाद अन्य जगहों से लाकर अयोध्या में दफनाया जाता है क्योंकि वे अयोध्या को एक पवित्र स्थली मानते हैं। सिक्ख धर्म के छठे गुरु तेग बहादुर ने अयोध्या में दो वर्ष गुजारे। उनकी स्मृति में यहां एक गुरुद्वारा निर्मित है।

चूंकि अयोध्या कम से कम पांच धर्मों का धार्मिक स्थल है इसलिए किसी एक धर्म के अनुयायी यदि यहां अपना एकाधिकार कायम करना चाहें तो वह अनुचित होगा। हिन्दू धर्म सबसे प्राचीन होने के कारण यहां ज्यादातर भवन हिन्दू धर्म से सम्बंधित हैं। किंतु जैसे जैसे इतिहास में नए धर्म आए उनसे जुड़े लोगों ने भी यहां अपनी गतिविधियां शुरू कीं। उनमें से कुछ यहां स्थाई रूप से निवासी हो गए। अतः अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों का भी यहां निर्माण हुआ। सिर्फ अयोध्या में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में ही विभिन्न धर्मों के अनुयायियों ने साथ में मिलजुल कर रहने की एक संस्कृति विकसित की है। अयोध्या इस संस्कृति का एक आदर्श नमूना है जिसके लिए भारत दुनिया भर में मशहूर है। वैसे अयोध्या का तो अर्थ ही है वह स्थान जहां युद्ध न होते हों। अयोध्या फैजाबाद से सटा हुआ है जो अवध प्रांत की राजधानी रहा है। अवध का भी अर्थ हुआ जहां किसी की हत्या न होती हो। यानी अवध और अयोध्या में तो ऐतिहासिक रूप से समझ बूझ कर साझी संस्कृति को बढ़ावा दिया गया। इसलिए यह उचित ही है कि अयोध्या में एक सर्व धर्म सद्भाव केन्द्र का निर्माण हो।

यह केन्द्र आधिनुक सभ्यता की जरूरतों को ध्यान में रख कर इस प्रकार से बनाया जाएगा कि दुनिया में धार्मिक कटट्रता की जगह सद्भावना के विचार को बढ़ावा मिले। लोग इस बात की जरूरत महसूस कर रहे हैं कि विभिन्न धर्मों या विचारों को मानने वाले लोग साथ में मिलकर रहना सीखें। अब वह पुराना तरीका जिसमें प्रत्येक धर्म का अनुयायी अपने धर्म को दूसरे धर्मों से श्रेष्ठ मानता है नहीं चलेगा। कुछ लोग दूसरे धर्मावलम्बियों का धर्म परिवर्तन करा अपने धर्म में शामिल कराना चाहते हैं। यह बात समझ से परे है कि जब ज्यादातर धर्म एक ईश्वर की कल्पना को स्वीकार किए हुए हैं तो आपस में प्रतिस्पर्धा का क्या कारण हो सकता है? यदि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों को छोड़ दिया जाए तो शायद इंसान द्वारा इंसान की हत्या करने का सबसे बड़ा कारण धर्म ही रहा है। इससे बड़ा कोई विरोधाभास नहीं हो सकता। धर्म हमें साथ में प्रेमपूर्वक रहना सिखाता है और धर्म के कारण ही हम एक दूसरे की जान लेने के लिए तैयार हो जाते हैं। सभी पैगम्बरों या अवतारों की शिक्षा लगभग एक जैसी ही रही है। ज्यादातर धर्म जरूरतमंदों की मदद करने का भी संदेश देते हैं। किंतु दया और करुणा के मूल्य तो हम आत्मसात करते ही नहीं। हम अपने जीवन की भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के कार्यक्रम से इतना समय नहीं निकाल पाते की लाचार लोगों की कुछ मदद कर सकें। हम उनकी स्थिति के लिए उन्हें ही जिम्मेदार मान आगे बढ़ जाते हैं।

अयोध्या में प्रस्तावित सर्व धर्म सद्भाव केन्द्र में किसी भी धर्मावलंबी को अपनी पूजा पद्धति से पूजा-अपासना करने की छूट के साथ ही विभिन्न धर्मिक, सामाजिक या दार्शनिक विषयों पर इस तरह से बहस की छूट रहेगी कि किसी अन्य विचार को मानने वाले की भावना को ठेस न पहुंचे। जो लोग केन्द्र का संचालन करेंगे उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि मतभेदों के बावजूद लोगों के बात रखने का तरीका ऐसा हो कि कोई भी आहत न हो। लोगों को प्रामाणिक बातें रखने में मदद मिले इसके लिए एक अत्याधुनिक पुस्तकालय का भी निर्माण किया जाएगा जिसमें कम्प्यूटर आदि की सुविधा रहेगी।

धर्म या अध्यात्म सिर्फ विचार के स्तर पर नहीं होता। धर्म के पालन का असली परीक्षण तो व्यवहार में होता है। चूंकि प्रस्तावित धार्मिक केन्द्र दुनिया में मानवता को स्थापित करने की दिशा में काम करेगा इसलिए सेवा की भावना इसके मूल में रहेगी। गुरुद्वारे की तरह यहां लंगर चलेगा ताकि भारतीय समाज में बड़े पैमाने पर विद्यमान कुपोषण की समस्या से निजात पाया जा सके। इस केन्द्र से किसी भी जरूरतमंद का मदद भी की जाएगी। शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, सरकारी योजनाओं को लाभ प्राप्त करने, सूचना का अधिकार जैसे कानूनों को समझने व उनका इस्तेमाल करने, आदि जैसे विषयों पर भी यह केन्द्र लोगों को यथासम्भव मदद करेगा। केन्द्र का संचालन करने वाले सेवा भावना से ओत-प्रोत स्वेच्छा से समय देने वाले कार्यकर्ता होंगे। केन्द्र का हिसाब-किताब पारदर्शी ढंग से रखा जाएगा ताकि किसी को भी मालूम चल सके कि केन्द्र का संचालन कैसे हो रहा है। अयोध्या में प्रस्तावित यह सर्व धर्म सद्भाव केन्द्र एक तरह से भविष्य के धर्मिक स्थलों का प्रतीक होगा।

लेखकः संदीप पाण्डेय, न्यासी, सर्व धर्म सद्भाव केन्द्र न्यास
ए-893, इंदिरा नगर, लखनऊ-226016
फोनः 0522 2347365, मो. 9451730269 (युगल किशोर शरण शास्त्री)


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