लोकसभा में कल पेश किया गया बजट किसानों और बेरोजगारों के साथ मोदी सरकार का एक और बड़ा धोखा है। देश भर के किसान अपनी उपज के लिए लाभाकरी पारिश्रमिक की गारंटी चाहते हैं, लेकिन मोदी सरकार ने उस जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है ।

लोकसभा में कल पेश किया गया बजट किसानों और बेरोजगारों के साथ मोदी सरकार का एक और बड़ा धोखा है। देश भर के किसान अपनी उपज के लिए लाभाकरी पारिश्रमिक की गारंटी चाहते हैं, लेकिन मोदी सरकार ने उस जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है ।
Pannalal Surana | The Modi- Shah Duo has dealt yet another blow to our federal structure, which is an important basic structure of our constitution. The central Home Ministry has taken away the Elgar Parishad case from the Pune police and handed it over to the National Investing Agency (NIA).
It is astonishing that even as citizens are protesting and are highly sceptical about the NPR-NRC process, the government, with only 60 days left to start, instead of allaying the fears is not ready with any answers, and are tight-lipped about what information will be collected.
On survey it was found that Mamasani kunta water body has been fully destroyed and constructions are ongoing in the water body by M/s Phoenix Spaces Pvt. Ltd.
How do you reconcile the village maps, satellite imageries, SOI topo maps, HUDA and HMDA masterplans of Mamasani Kunta vis-a-vis the culvert identified and partially dug up that has now been obstructed by Phoenix constructions right on the inflow channel of Mamasani Kunta that further connects to the Balkapur channel.
देश की राजधानी में सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक, जेएनयू में कानून व्यवस्था का इस तरह जर्जर हाल, जिसके लिए जिम्मेदार लोग शासक वर्ग से सम्बंधित हैं, इस बात का प्रमाण है कि सरकार कैसे तानाशाही और गैर-लोकतान्त्रिक ढंग से शासन कर रही है.
Such a complete breakdown of law and order in the country’s capital, on the campus of one of its most renowned institutions, which by all indications was perpetrated by forces affiliated with the ruling party, is indicative of the absolute impunity and high-handedness with which our central government is currently functioning.
देश में केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण खेती-किसानी का संकट अब सिर्फ कृषि संकट नहीं रह गया है, यह समूचे समाज और सभ्यता का संकट बन गया है।
राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में, स्वास्थ्य जैसी मौलिक आवश्यकता पर खर्च अनेक गुणा बढ़ाने के बजाये, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों को दूर करने के लिए, निजीकरण का रास्ता सुझाया जा रहा है।
Privatisation can only lead to superficial improvements, while inevitably reducing access.