Commentary
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जब मुस्लिम महिलाएं मेरी रक्षक बन गईं
संदीप पाण्डेय | यह बहादुरी तो मैंने दूर से देखी और सुनी थी। किंतु 21 मार्च को तो प्रत्यक्ष मैंने महिलाओं की बहादुरी को देखा।
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In the Name of Coronavirus
Sandeep Pandey | Steps taken to check the spread of coronavirus appears merely to be a public relations exercise. Otherwise, how is the Parliament still functioning, when all other public institutions have been closed; why are religious activities in temples of Ayodhya or Gorakhpur still continuing?
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह के स्मृति में विशेष
नीरज कुमार | भगत सिंह की यह निश्चित मान्यता थी कि “व्यक्तियों को नष्ट किया जा सकता है, पर क्रांतिकारी विचारों को नष्ट नहीं किया जा सकता।
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डॉ॰ राममनोहर लोहिया के जन्मदिवस पर विशेष
नीरज कुमार | डॉ॰ लोहिया का जीवन और चिंतन दोनों एक प्रयोग था । यदि महात्मा गांधी का जीवन सत्य के साथ प्रयोग था तो डॉ॰ लोहिया का जीवन और चिंतन समतामूलक समाज की स्थापना के लिए सामाजिक दर्शन और कार्यक्रमों के साथ एक प्रयोग था ।
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कोविड-19 : चार सुझाव
प्रेम सिंह | वायरस का सामाजिक संक्रमण होता है तो हालत भयावह होंगे. विशाल आबादी, नितांत नाकाफी स्वास्थ्य सेवाएं, अस्वच्छ वातावरण, व्यापक पैमाने पर फैली बेरोजगारी, जर्जर अर्थव्यवस्था जैसे कारको के चलते बड़े पैमाने पर मौतें हो सकती हैं
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राजनीति और धर्म
नीरज कुमार | जब तक धर्म संप्रदायवादी, अलगाववादी कट्टरपंथियों के हाथों में रहेगा, इसका गलत इस्तेमाल होता रहेगा । इसलिए धर्म को नकारने कि नहीं बल्कि उसे सहिष्णु रूप में रखने की जरूरत है ।
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Letter to Shri Uddhavrao Thackeray: CAA a Clear Violation of Article 14 of Constitution
It is good that you met Shri, Narendra Modi, Prime Minister and talked about the problems of our State. After that meeting, as per the news reports, while talking to the press, you said that it is not necessary to worry about CAA because it is about granting citizenship.
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सोशलिस्ट पार्टी युवा सभा सम्मेलन प्रस्ताव विषय: रोजगार बने मौलिक अधिकार
बेरोजगारी एक व्यापक व भयावह समस्या बन चुकी है परंतु देश की आजादी के सत्तर वर्ष से ज्यादा बीत जाने के बाद भी सत्ता में रही सरकारों तथा राजनीति दलों ने इसे मुद्दा बनाया पर मौलिक अधिकार बनाने की जरूरत कभी नही समझी गयी
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राजनीतिक पराजय के बाद की पुकार!
प्रेम सिंह | यह अब छिपी सच्चाई नहीं है कि देश के बौद्धिक नेतृत्व ने नवसाम्राज्यवाद विरोधी राजनीति के स्वरूप और संघर्ष को मुकम्मल और निर्णायक नहीं बनने देने की ठानी हुई है.
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सीएए/एनआरसी/एनपीआर विरोधी आंदोलन : आशा और संभावनाएं
प्रेम सिंह | एक महीना से ऊपर हो गया है. पूरे देश में सीएए/एनआरसी/एनपीआर के विरोध में जो आवाज उठी है उसकी धुरी मुसलमान हैं. यह आंदोलन काफी हद तक स्वत:स्फूर्त है. पहले नौजवानों और फिर महिलाओं की भागीदारी ने इस आंदोलन को विशेष बना दिया है.
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The Anti-CAA/NRC/NPR Movement: Hope and Prospects
Dr Prem Singh | The participation of young people and the women has made this movement unique. Shaheen Bagh’s dharna in Delhi, despite many allegations and counter-allegations, has become a symbol of the spontaneous movement which has had an impact on other cities of the country.
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फोर्ड फाउंडेशन के बच्चों का राजनीतिक आख्यान
प्रेम सिंह | देश की राजनीति में नवउदारवाद की तानाशाही चल रही है. समाजवादी शायद यह नहीं समझ पाए कि इस तानाशाही के तहत राजनीति करने वाली पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र चल ही नहीं सकता.
