उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के अंतर्गत प्रार्थना सभाओं को निशाना बनाकर ईसाइयों के उत्पीड़न का पैटर्न: प्रकरणों का दस्तावेज़ीकरण (2022–2026)

कार्यकारी सारांश

यह रिपोर्ट जुलाई 2022 से जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से संबंधित 17 मामलों का दस्तावेज़ीकरण प्रस्तुत करती है, जिनमें पादरियों (पास्टर्स), ईसाई विश्वासियों तथा प्रार्थना सभाओं में भाग लेने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के अंतर्गत मुकदमे दर्ज किए गए।

दस्तावेजीकृत मामलों से निम्नलिखित आवर्ती विशेषताएँ सामने आती हैं:

· निजी घरों या किराए के परिसरों में आयोजित प्रार्थना सभाओं को ऐसे समूहों द्वारा बाधित किया गया, जो कभी-कभी स्वयं को हिंदुत्व संगठनों से संबद्ध बताते थे या उनसे जुड़े हुए थे;

· पुलिस ने अनेक मामलों में वास्तविक धर्म परिवर्तन के सीमित या अपर्याप्त साक्ष्यों के बावजूद अवैध धर्म परिवर्तन के आरोप में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ़आईआर) दर्ज की;

· अनेक एफ़आईआर में आरोपों की भाषा अत्यंत समान है, जिनमें ईसाई धर्म की महिमा का बखान, हिंदू धर्म की निंदा, धर्म परिवर्तन के लिए धन का प्रलोभन, उसके बाद विवाद उत्पन्न होना तथा चमत्कारिक उपचार का वादा किए जाने जैसे आरोप शामिल हैं;

· बाराबंकी जनपद के तीन मामलों में शिकायतकर्ता एक ही व्यक्ति है;

· 17 शिकायतकर्ताओं में से 2 बजरंग दल या विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों के पदाधिकारी या कार्यकर्ता थे तथा एक मामले में शिकायतकर्ता किसी कथित धर्मांतरित व्यक्ति के बजाय स्वयं एक पुलिस थाने का थाना प्रभारी (एस.ओ.) था;

· कई अभियुक्तों को जमानत मिलने से पहले सप्ताहों या महीनों तक न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा;

· दो मामलों में गर्भवती महिलाओं को जेल भेजा गया, जिनमें से एक का वहीं गर्भपात हो गया;

· कुछ मामलों में अभियुक्तों ने मारपीट, धमकी या हिरासत में दुर्व्यवहार के आरोप लगाए;

· अधिकांश मामलों में अभियुक्तों को जमानत मिली, क्योंकि न्यायालयों ने एफ़आईआर में कमियाँ पाईं तथा अभियुक्तों का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं पाया;

· अब तक केवल एक मामले में दोषसिद्धि हुई है तथा चार मामलों में अभियुक्त बरी हुए हैं;

· कई मामलों में अनुसूचित जाति से संबंधित ईसाई या ईसाई आस्था रखने वाले लोग शामिल थे, जो आधिकारिक अभिलेखों में स्वयं को हिंदू ही दर्ज कराते रहे, क्योंकि धर्म परिवर्तन करने पर अनुसूचित जाति के आरक्षण एवं अन्य लाभों की पात्रता प्रभावित हो सकती थी।

इन सभी मामलों को समग्र रूप से देखने पर यह संकेत मिलता है कि धर्म परिवर्तन विरोधी कानून का उपयोग केवल कथित बलपूर्वक या कपटपूर्ण धर्म परिवर्तन की वास्तविक शिकायतों की जाँच तक सीमित न रहकर शांतिपूर्ण धार्मिक सभाओं तथा संविधान द्वारा संरक्षित धार्मिक आचरण के विरुद्ध भी किया जा रहा है।

इन मामलों में परिलक्षित पैटर्न पुलिस जाँच की निष्पक्षता के संबंध में भी चिंताएँ उत्पन्न करता है। अनेक मामलों में पुलिस ने तीसरे पक्ष से शिकायत प्राप्त होते ही तत्काल एफ़आईआर दर्ज की, प्रार्थना सभा में उपस्थित लोगों को गिरफ्तार कर लिया तथा ऐसी स्थिति में भी कार्यवाही आगे बढ़ाई, जबकि कोई भी व्यक्ति स्वयं यह दावा करने के लिए सामने नहीं आया था कि उसका अवैध रूप से धर्म परिवर्तन कराया गया है।

कानूनी परिप्रेक्ष्य

उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 मिथ्या निरूपण, बल, अनुचित प्रभाव, दबाव, प्रलोभन या कपटपूर्ण साधनों द्वारा कराए गए धर्म परिवर्तन को अपराध घोषित करता है।

वर्ष 2024 में इस अधिनियम में संशोधन कर इसके दायरे का विस्तार किया गया। अन्य परिवर्तनों के साथ-साथ संशोधन के बाद अब केवल कथित धर्मांतरित व्यक्ति या उसके निकट संबंधी ही नहीं, बल्कि कोई भी व्यक्ति अवैध धर्म परिवर्तन का आरोप लगाते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ़आईआर) दर्ज करा सकता है। आलोचकों का तर्क है कि इससे तीसरे पक्ष द्वारा शिकायत दर्ज कराने की संभावना अत्यधिक बढ़ गई है तथा कानून के दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ी है।

भारत का संविधान अनुच्छेद 25(1) के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को, लोक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य तथा इस भाग (मौलिक अधिकारों) के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्र रूप से अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है। पुलिस की कार्यवाही तथा कुछ मामलों में न्यायालयों के निर्णय इस संवैधानिक प्रावधान के उल्लंघन की प्रतीत होते हैं।

उभरता हुआ पैटर्न

दस्तावेजीकृत मामलों के विश्लेषण से कई आवर्ती विशेषताएँ सामने आती हैं।

1. प्रार्थना सभाएँ ही कार्रवाई का कारण बनती हैं

लगभग प्रत्येक दस्तावेजीकृत मामले में पुलिस की कार्रवाई किसी निजी आवास या किराए के परिसर में आयोजित प्रार्थना सभा के बाद हुई।

2. तीसरे पक्ष के शिकायतकर्ता

अनेक शिकायतकर्ता ऐसे व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने स्वयं धर्म परिवर्तन का दावा किया हो। इसके बजाय वे ऐसे संगठनों के सदस्य या पदाधिकारी थे, जिन्होंने प्रार्थना सभा पर आपत्ति जताई।

3. एक जैसी पुनरावृत्त आरोपों की भाषा

अनेक एफ़आईआर में लगभग समान आरोप दर्ज किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—

· हिंदू धर्म की निंदा;

· ईसाई धर्म की महिमा का बखान;

· चमत्कारिक उपचार का वादा;

· गरीब लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास;

· शिकायतकर्ता द्वारा आपत्ति करना;

· धमकी देना तथा उसके बाद धन का प्रलोभन देना।

विभिन्न जिलों में आरोपों की भाषा में यह समानता मानकीकृत शिकायतों के उपयोग को लेकर चिंताएँ उत्पन्न करती है।

4. पुलिस का हस्तक्षेप

पुलिस ने अनेक मामलों में शिकायत प्राप्त होते ही, या कभी-कभी शिकायतकर्ता के साथ मिलकर, प्रार्थना सभाओं में प्रवेश किया और अवैध धर्म परिवर्तन के संबंध में किसी न्यायिक निष्कर्ष से पहले ही प्रतिभागियों को गिरफ्तार कर लिया।

5. लंबी अवधि तक कारावास

कई अभियुक्तों को जमानत मिलने से पहले सप्ताहों या महीनों तक जेल में रहना पड़ा।

6. धार्मिक आचरण पर प्रभाव

अनेक पादरियों ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद उन्होंने प्रार्थना सभाएँ बंद कर दीं या अपनी धार्मिक गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी कर दी।

मामले

नीचे कुछ ऐसे मामलों के नमूने दिए जा रहे हैं जो हमारे संज्ञान में आए। प्रतीत होता है कि 2021 में यह कानून लागू होने के बाद से उत्तर प्रदेश में ऐसे सैकड़ों मामले दर्ज हुए हैं।

मामला 1

अभियुक्त: (1) इन्द्रकला पत्नी महेन्द्र कुमार, निवासी पिपरी, कप्तानगंज, आज़मगढ़, (2) सुभागी देवी पत्नी घनश्याम, निवासी विशुनपुर, महाराजगंज, आज़मगढ़, (3) साधना पत्नी दयाराम, निवासी अखरचंदा, महाराजगंज, आज़मगढ़, (4) समता पत्नी सुनील, निवासी पसीपुर, महाराजगंज, आज़मगढ़, (5) अनीता पत्नी स्व. गोपाल, निवासी बड़की गढ़न, तहबरपुर, आज़मगढ़, (6) सुनीता पत्नी स्व. नागेन्द्र, निवासी विशुनपुर, महाराजगंज, आज़मगढ़

थाना: महाराजगंज, जनपद आज़मगढ़

एफआईआर संख्या: 0286
दिनांक: 30/07/2022

धाराएँ: भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 504 एवं 506 तथा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1)।

शिकायतकर्ता: आशुतोष सिंह

घटना: आशुतोष सिंह का आरोप है कि इन्द्रकला तथा अन्य अभियुक्त महिलाएँ ग्राम महाराजगंज के वार्ड संख्या 1 स्थित अनुसूचित जाति बस्ती विशुनपुर में हिन्दू धर्म का अपमान तथा ईसाई धर्म का महिमामंडन करके लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रही थीं। आरोप है कि जब इनमें से एक महिला के बच्चे का जन्मदिन मनाया जा रहा था, तब शिकायतकर्ता वहाँ पहुँचा और उसने बच्चे के लिए प्रार्थना होते देखी, जिसे उसने धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास माना। उसने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने इस प्रार्थना का विरोध किया तो उसे भी धर्म परिवर्तन के लिए धन का प्रलोभन दिया गया।

वर्तमान स्थिति: अभी तक अंतिम रिपोर्ट (Final Report) दाखिल नहीं हुई है। सभी अभियुक्त जमानत पर हैं।


मामला 2

अभियुक्त: (1) हरखू राम, निवासी गोबरहा, फूलपुर, आज़मगढ़, (2) अच्छे लाल, निवासी हाबू खान हरिजन बस्ती, सरायमीर, आज़मगढ़, (3) चन्द्रेश कुमार पुत्र गुलाब चन्द, निवासी गोबरहा, फूलपुर, आज़मगढ़

थाना: फूलपुर, आज़मगढ़

एफआईआर संख्या: 0370
दिनांक: 23/11/2022

धाराएँ: उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1)।

शिकायतकर्ता: प्रशांत सिंह, जिला संयोजक, बजरंग दल, फूलपुर

घटना: शिकायतकर्ता का आरोप है कि पादरी अच्छे लाल, हरखू राम के घर पर लोगों का ईसाई धर्म में धर्म परिवर्तन कराते थे। उसने कहा कि जिज्ञासावश जब वह वहाँ गया तो उसने देखा कि हिन्दू धर्म की निंदा तथा ईसाई धर्म का महिमामंडन किया जा रहा था, जिससे उसकी धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। विरोध करने पर उसे भी धर्म परिवर्तन के लिए धन का प्रलोभन दिया गया।

वास्तव में हरखू राम का निधन वर्ष 2010 में हो चुका था। अच्छे लाल को 24/11/2022 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

वर्तमान स्थिति: अभी तक अंतिम रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई है। अच्छे लाल को 15/12/2022 को जमानत मिल गई। चन्द्रेश कुमार, जिसका नाम प्रारम्भिक एफआईआर में नहीं था, को 28/12/2022 को गिरफ्तार किया गया तथा 12/01/2023 को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई।


मामला 3

अभियुक्त: (1) बजरंग पुत्र मयराम, निवासी हुलास खेड़ा, मोहनलालगंज, लखनऊ दक्षिण, (2) बजरंग के परिवार के सदस्य, (3) अन्य अज्ञात व्यक्ति

थाना: लोनीकटरा, जनपद बाराबंकी

एफआईआर संख्या: 0190
दिनांक: 16/07/2023

धाराएँ: भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 107; सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम, 1984 की धारा 3 एवं 4; तथा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1)।

शिकायतकर्ता: विजय हिन्दुस्तानी

घटना: विजय हिन्दुस्तानी का आरोप है कि बजरंग तथा उसके परिवार के लगभग एक दर्जन सदस्य पिछले एक वर्ष से मंगलपुर रेलवे क्रॉसिंग के निकट रेलवे भूमि पर रह रहे थे तथा लोगों को जालंधर ले जाकर उनका धर्म परिवर्तन कराते थे। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसने अपने मित्र ओम प्रकाश सिंह के साथ 112 पर पुलिस को सूचना दी और बजरंग तथा उसके परिवार के सदस्यों को रंगे हाथ पकड़वाया।

वर्तमान स्थिति: मुकदमे का विचारण (Trial) जारी है।


मामला 4

अभियुक्त: (1) सियाराम गौतम पुत्र स्व. छन्नू रामचरण, (2) किशोर गौतम पुत्र सियाराम दोनों निवासी ग्राम सरैया मकबूलपुर, पोस्ट कुटलूपुर, देवा, जनपद बाराबंकी, (3) बरसाती रावत पुत्र छोटेलाल, निवासी मोहम्मदपुर, देवा, बाराबंकी

थाना: देवा, जनपद बाराबंकी

एफआईआर संख्या: 0645
दिनांक: 27/07/2023

धाराएँ: भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 504 एवं 506 तथा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1)।

शिकायतकर्ता: रमाकांत बाजपेयी

घटना: 27/07/2023 को जब एक प्रार्थना सभा चल रही थी, तब विरोधी पक्ष पुलिस के साथ किशोर गौतम के घर पहुँचा और किशोर गौतम तथा उसके चाचा बरसाती रावत को थाने ले गया। किशोर गौतम पहले 5 दिन और उसके बाद लगभग एक महीने तक जेल में रहा।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि तीनों अभियुक्त प्रत्येक गुरुवार को बाहर से लोगों को बुलाते थे और धर्म परिवर्तन की गतिविधियों में संलिप्त थे।

वर्तमान स्थिति: 10/06/2026 को किशोर गौतम को उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1) के तहत दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। अन्य दोनों अभियुक्त बरी कर दिए गए।


मामला 5

अभियुक्त: (1) हरेन्द्र सिंह पुत्र सदुल सिंह, (2) प्रिया सिंह पत्नी हरेंद्र सिंह, दोनों निवासी 3/334, जानकीपुरम एक्सटेंशन, लखनऊ उत्तर

थाना: हैदरगढ़, बाराबंकी

एफआईआर संख्या: 0271
दिनांक: 30/07/2023

धाराएँ: उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1)।

शिकायतकर्ता: विजय हिन्दुस्तानी

घटना: 30/07/2023 को प्रातः 11 बजे जनपद बाराबंकी के नगर क्षेत्र हैदरगढ़ स्थित ठठराही में हरेंद्र सिंह एवं प्रिया सिंह के स्थानीय निवास पर प्रार्थना सभा चल रही थी। तभी 30–40 लोग घर में घुस आए और बाइबिल की उपस्थिति के बारे में पूछताछ करने लगे तथा वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। जब हरेंद्र ने भी घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग शुरू की तो उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया। पति, पत्नी तथा उनके चार वर्षीय पुत्र रिहांश को थाना हैदरगढ़ ले जाया गया। पुलिस ने उनके बैंक खातों तथा धन के स्रोत के बारे में पूछताछ की। पूछताछ के दौरान थाने के बाहर भीड़ एकत्र हो गई। हरेंद्र और उनकी पत्नी प्रिया को बाराबंकी जेल में 13 दिन बिताने पड़े।

वर्तमान स्थिति: वर्तमान में पति-पत्नी दोनों जमानत पर हैं। परिवार हैदरगढ़ छोड़कर अब लखनऊ में रह रहा है। उनकी गतिविधियाँ बंद हो गई हैं। पुलिस ने 26/08/2023 को जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के उपरांत अभियुक्तों को दंडित किए जाने की अनुशंसा की गई।


मामला 6

अभियुक्त: (1) संतोष के. निषाद पुत्र बद्री निषाद, निवासी मदनपुरा, निचलौल, महाराजगंज, (2) अंगद के. निषाद पुत्र रोगी, निवासी मिठौरा, सिंदुरिया, महाराजगंज

थाना: निचलौल, जनपद महाराजगंज

एफआईआर संख्या: 0410
दिनांक: 20/08/2023

धाराएँ: भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 323 एवं 506 तथा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1)।

शिकायतकर्ता: शेषमणि गौड़

घटना: शेषमणि गौड़ का आरोप है कि संतोष तथा उसके साले अंगद ने उसे ईसाई बनने का प्रलोभन दिया और जब उसने इनकार किया तो उसकी रुद्राक्ष की माला तोड़ दी तथा उसके साथ मारपीट की। किन्तु 10/01/2024 को महाराजगंज सत्र न्यायालय में दिए गए अपने बयान में उसने इन आरोपों से इनकार कर दिया। उसने कहा कि 20/08/2023 को उसे थाने ले जाया गया और एक दिन की मजदूरी देने का आश्वासन देकर उससे कोरे कागज़ पर हस्ताक्षर करा लिए गए। वह पेशे से पेंटर है।

पादरी संतोष निषाद के अनुसार, 20/08/2023 को उनके घर पर प्रार्थना सभा चल रही थी, तभी लगभग 10 लोगों का एक समूह वहाँ घुस आया और लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते हुए उनके साथ मारपीट की। अगले दिन उपर्युक्त एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें तथा उनके साले को गिरफ्तार कर लिया गया।

वर्तमान स्थिति: 21/03/2025 को अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा दोनों अभियुक्तों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।


मामला 7

अभियुक्त: (1) परमेश्वर राम पुत्र फूलचन्द्र राम, (2) बृजेश यादव पुत्र शिव बचन यादव, (3) पूनम यादव पुत्री शिव बचन यादव — सभी निवासी: तिसौरा माफी, जहानागंज, आज़मगढ़।

थाना: जहानागंज, आज़मगढ़

एफआईआर संख्या: 0397, दिनांक: 10/09/2023

धाराएँ: भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 504 एवं 506 तथा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1)।

शिकायतकर्ता: मृत्युंजय के. बरनवाल

घटना: 10/09/2023 को परमेश्वर राम के घर पर प्रार्थना सभा चल रही थी। मृत्युंजय बरनवाल की शिकायत पर पुलिस ने परमेश्वर राम, बृजेश यादव तथा उनकी बहन पूनम को निर्दोष लोगों का धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। उस समय पूनम तीन माह की गर्भवती थीं और उन्हें उनकी एक वर्ष की बेटी के साथ जेल भेज दिया गया।

एफआईआर के अनुसार, मृत्युंजय बरनवाल अपने मित्र मुनीव गुप्ता के साथ प्रार्थना सभा में गए, जहाँ उन्होंने सुना कि सनातन धर्म का अपमान किया जा रहा है। इससे उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए धन का प्रलोभन दिया गया।

वर्तमान स्थिति: सभी अभियुक्तों को 16/10/2023 को अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा जमानत प्रदान कर दी गई।


मामला 8

अभियुक्त: (1) जयप्रभु पुत्र नटराज, निवासी पटवध, चोपन, सोनभद्र; (2) चेक्का इमैनुअल पुत्र सी. एस. प्रसून कुमार; (3) के. सौजन्या पत्नी चेक्का इमैनुअल — दोनों निवासी सिंदुरिया, चोपन, सोनभद्र; (4) फादर पारस, निवासी चोपन, सोनभद्र; (5) शंखलाल भारती पुत्र हरिहर; (6) संतलाल गौड़ — दोनों निवासी बोधाडीह करहिया गुलरिया, जुगैल, सोनभद्र; (7) नरेंद्र कुमार पुत्र नरमा राम; (8) रा निरोहर राम पुत्र नन्हक; (9) रामकेश कुमार पुत्र रघुनाथ राम; (10) प्रेमनाथ राम पुत्र रामलखन — सभी निवासी उरमौरा कस्बा, रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र; (11) मिस्टर अजय पुत्र शारदा प्रसाद; (12) छोटू पुत्र रामपति राम; (13) सोहन राम पुत्र स्व. हृदय — सभी निवासी मुसाही, थाना रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र; (14) विजय पुत्र स्व. रामनाथ, निवासी सोनभद्र; (15) गुड्डू राम पुत्र शिवनाथ राम, निवासी मुसाही, थाना रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र; (16) विजय कुमार पुत्र स्व. राम किशुन; (18) रामनिवास राम पुत्र स्व. जवाहिर — दोनों निवासी पूरब मोहल, थाना रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र; (19) जागरनाथ राम पुत्र स्व. राम दाऊद राम; (20) विजय शंकर राम पुत्र जागरनाथ राम; (21) रामपति पुत्र रामनंदन — सभी निवासी लोढ़ी, थाना रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र; (22) भारत लाल पुत्र रमई प्रजापति; (23) रामप्रताप पुत्र श्रीनाथ राम; (24) रमाकांत पुत्र गुपुत राम; (25) रामबचन पुत्र रदुलारे — सभी निवासी बाबुरी, थाना रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र; (26) परमानंद भारती, निवासी पड़री कला, पन्नूगंज, सोनभद्र; (27) रामरतन उर्फ बल्लर हरिजन, निवासी कसारी, थाना पन्नूगंज, सोनभद्र; (28) विजेन्द्र हरिजन; (29) राजेन्द्र कोल — दोनों निवासी तियरा, थाना पन्नूगंज, सोनभद्र; (30) प्रेमनाथ हरिजन, निवासी दुबेपुर बैनी, रायपुर, सोनभद्र; (31) संजय जॉन (पादरी), निवासी सरायगढ़, थाना रायपुर, सोनभद्र; (32) रामदुलार मौर्य पुत्र अंतू; (33) सुनील कुमार पुत्र रामविचार हरिजन — दोनों निवासी कुसुम्हा, थाना म्योरपुर, सोनभद्र; (34) अक्षय विश्वकर्मा, निवासी रेहटा, थाना अनपरा, सोनभद्र; (35) प्रकाश एच. एल. मरांडी, शिक्षक, सेंट जोसेफ स्कूल, शक्तिनगर, सोनभद्र; (36) दुर्गावती देवी, सफाई कर्मचारी, ग्राम बरवानी, शक्तिनगर, सोनभद्र; (37) सतीश पुत्र लाले, निवासी पटना, थाना रामपुर बरकोनिया, सोनभद्र; (38) प्रेम प्रजापति पुत्र गौरीशंकर, निवासी धरमदासपुर, रामपुर बरकोनिया, सोनभद्र; (39) सुरेश पुत्र दीनानाथ, निवासी कर्माओं, पुलिस चौकी चुरक, रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र; (40) राजकुमार पुत्र बाबूलाल, निवासी नगवा, थाना दुद्धी, सोनभद्र; (41) प्रदीप खरवार पुत्र बितान खरवार, निवासी नगवा, थाना दुद्धी, सोनभद्र; (42) विजय कुमार उर्फ संजय भारती पुत्र मिश्रीलाल भारती, निवासी कचन, थाना म्योरपुर, सोनभद्र।

थाना: चोपन, सोनभद्र

एफआईआर संख्या: 0269, दिनांक: 29/11/2023

धाराएँ: उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 5(1) एवं 3।

शिकायतकर्ता: नरसिंह

विवरण: शिकायतकर्ता का आरोप है कि जयप्रभु, जो मूलतः चेन्नई के निवासी हैं, वर्ष 2011 में रेणुकूट स्थित जेम्स टी.सी. लुईस चर्च आए और वर्ष 2017 में बुद्धिनाथ शुक्ला से भूमि खरीदकर वहीं बस गए। इसी प्रकार चेक्का इमैनुअल, उनकी पत्नी के. सौजन्या तथा फादर पारस विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) से आए और लोगों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर तथा “चंगाई सभा” आयोजित कर, जिसमें बीमारियों से मुक्ति का आश्वासन दिया जाता था, ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करते रहे। आरोप है कि वे यीशु मसीह को एकमात्र ईश्वर एवं उद्धारकर्ता बताते थे तथा क्षेत्र के अशिक्षित, गरीब एवं भोले-भाले आदिवासी लोगों का लाभ उठाते थे।

29/11/2023 को पुलिस ने 22 लोगों को गिरफ्तार किया।

वर्तमान स्थिति: अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप तय किए जा चुके हैं।


मामला 9

अभियुक्त: सरजू प्रसाद

थाना: कैंट, अयोध्या

एफआईआर संख्या: 206/2024

शिकायतकर्ता: निर्मल पाण्डेय

घटना: अभियुक्त सरजू प्रसाद के पुत्र अतुल कुमार के अनुसार, 23/06/2024 को प्रातः 10 बजे सरजू प्रसाद अपने निवास 597, सूबेदार का पुरवा, गद्दोपुर, पोस्ट मझवां, जनपद अयोध्या में प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे थे। तभी दो व्यक्ति वहाँ आए। उनमें से एक ने अपना नाम निर्मल पाण्डेय बताते हुए स्वयं को पत्रकार बताया। उसने पुलिस को बुलाकर सरजू प्रसाद पर लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया।

सरजू प्रसाद ने स्पष्ट किया कि वे यीशु मसीह में विश्वास रखते हैं, किन्तु उन्होंने धर्म परिवर्तन नहीं किया है और वे हिंदू ही हैं। उसी दिन शाम लगभग 5 बजे पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई।

सरजू प्रसाद के पुत्र अतुल कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि पुलिस कई बार उनके घर आई, परिवार के सदस्यों को झूठे मुकदमों में फँसाने की धमकी दी तथा सरजू प्रसाद का मोबाइल फोन अपने साथ ले गई। साथ ही, सरजू प्रसाद को अगले दिन न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया।

वर्तमान स्थिति: सरजू प्रसाद को 10/04/2025 को उच्च न्यायालय से जमानत प्राप्त हुई।


मामला 10

अभियुक्त: (1) अच्छे लाल पुत्र श्यामलाल, निवासी ग्राम एवं पोस्ट पखरौली, कोतवाली देहात, जनपद सुल्तानपुर; (2) राजीव कुमार पुत्र राजाराम, निवासी केनौरा, कोतवाली देहात, सुल्तानपुर; (3) मुकेश पुत्र प्रमोद कुमार, निवासी बैनी, लम्भुआ, सुल्तानपुर; (4) सुभाष कुमार पुत्र स्व. मिठ्ठूलाल, निवासी सराय अचल, कोतवाली देहात, सुल्तानपुर।

थाना: देहात कोतवाली, जनपद सुल्तानपुर

एफआईआर संख्या: 0373, दिनांक: 15/09/2024

धाराएँ: उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1) तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 351(3)।

शिकायतकर्ता: सुमन राव

घटना: अभियुक्तों के अनुसार, 15/09/2024 को लगभग 20–25 लोगों की प्रार्थना सभा चल रही थी। तभी दो व्यक्तियों ने सभा में हस्तक्षेप किया और पुलिस को साथ लेकर आए। अभियुक्तों को थाने ले जाया गया, जहाँ पुलिस की वर्दी में न होने वाले कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की।

वर्तमान स्थिति: 14 माह जेल में रहने के बाद अभियुक्तों को जमानत मिल चुकी है। उनकी धार्मिक गतिविधियाँ बंद हो गई हैं। मुकदमे का विचारण जारी है।


मामला 11

अभियुक्त: बेचू आज़ाद उर्फ छेदीलाल पुत्र रामबली कोरी, निवासी रामदासपुर, पोस्ट इनायतपुर, गोसाईंगंज, जनपद सुल्तानपुर।

थाना: गोसाईंगंज, जनपद सुल्तानपुर

एफआईआर संख्या: 0410, दिनांक: 27/10/2024

धाराएँ: भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 351(2) एवं 351(3) तथा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1)।

शिकायतकर्ता: जियालाल कोरी

घटना: अभियुक्त के अनुसार, 27/10/2024 को उनके घर पर प्रार्थना सभा चल रही थी। उसी दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता पुलिस के साथ उनके घर में घुस आए और वहाँ उपस्थित लोगों के साथ मारपीट करने लगे। पुलिस ने उनसे पूछा कि उनका संगठन पंजीकृत क्यों नहीं है। इसके बाद पुलिस ने उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया।

वर्तमान स्थिति: बेचू आज़ाद को 27/11/2024 को अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा जमानत प्रदान की गई।


मामला 12

अभियुक्त: (1) मुन्नीलाल पुत्र सुखीराम रावत, (2) मुन्नी लाल पुत्र खुशीराम, (3) रामकला पत्नी मुन्नीलाल, (4) संजू पत्नी बबलू, (5) विद्यावती पत्नी रसाजीवन — सभी निवासी गौतमनपुरवा मजरे रौनी, हैदरगढ़, बाराबंकी; (6) परशुराम पुत्र मतई, निवासी जोरास, लोनीकटरा, बाराबंकी; (7) गोकरण पुत्र भरोसे, निवासी गोरिया पुरवा मजरे डुंडीपुर, लोनीकटरा, बाराबंकी; (8) राधा पत्नी जगजीवन, (9) सिलोचनी पत्नी शिवरा, (10) दीना पुत्र स्व. पंचम — सभी निवासी मंगलपुर, लोनीकटरा, बाराबंकी।

थाना: हैदरगढ़, जनपद बाराबंकी

एफआईआर संख्या: 0376, दिनांक: 07/11/2024

धाराएँ: उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1)।

शिकायतकर्ता: विजय हिंदुस्तानी

विवरण: विजय हिंदुस्तानी का दावा है कि उन्हें सूचना मिली कि मुन्नी लाल पुत्र खुशीराम रावत के घर के बाहर कुछ लोग एकत्रित थे और परशुराम तथा गोकरण अन्य लोगों को यह प्रचार कर रहे थे कि ईसाई धर्म में बीमारियों को ठीक करने की शक्ति है तथा इसी उद्देश्य से वे लोगों का धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। इस सूचना के आधार पर उन्होंने 07/11/2024 को पुलिस को सूचित किया।

वर्तमान स्थिति: नौ अभियुक्तों को 19/11/2024 को सत्र न्यायालय द्वारा जमानत प्रदान कर दी गई।


मामला 13

अभियुक्त: (1) अशोक कुमार पुत्र जगन्नाथ, निवासी अटरिया, जनपद सीतापुर। (2) अनुराग भारती पुत्र राजेश कुमार, निवासी ग्राम राजलामऊ, पोस्ट इस्माइलपुर, थाना गुरसहायगंज, जनपद कन्नौज। (3) बलराम पुत्र सुंदर लाल, निवासी ग्राम बुधनापुर, पोस्ट महेवागंज, थाना कोतवाली सदर, जनपद लखीमपुर खीरी। (4) रामपाल पुत्र परमेश्वर, निवासी ग्राम फत्ते खेरवा, पोस्ट मंडुरी, थाना रामपुर कलां, जनपद सीतापुर। (5) अनिल कुमार पुत्र देवदत्त, निवासी ग्राम गोपालपुर, थाना गोला, जनपद लखीमपुर खीरी। (6) चेंदा दुक्पा पुत्र स्वर्गीय ताशी दुक्पा, निवासी विवेक नगर, सिधौली, सीतापुर। (7) अंकित रावत पुत्र राम कुमार, निवासी ग्राम चतुरपुर, पोस्ट कुम्हरावां, थाना इटौंजा, जनपद लखनऊ। (8) निकसन बक्श पुत्र विल्सन बक्श। (9) आबिएल बक्श पुत्र निकसन बक्श, दोनों निवासी अमरैथा रोड, जालिम खेड़ा, नवाबगंज, थाना अजगैन, जनपद उन्नाव। (10) मनीषा सिंह पत्नी एल्गिन सिंह, निवासी मोहनपुर ग्रांट उचौलिया, थाना पसिगवां, जनपद लखीमपुर खीरी। (11) राम पदारथ यादव पुत्र कुंज बिहारी, निवासी सोमेश्वर नगर-II, मामा-भांजा तालाब, सीओडी रोड कस्बा, थाना नैनी, जनपद इलाहाबाद। (12) कृष्ण पाल उर्फ समर्पण पुत्र मुन्नालाल, निवासी आराजी संख्या 374, ननकारी बगिया चर्च प्रधान गेट के निकट, थाना कल्याणपुर, कानपुर। (13) सुनील पुत्र मैकूलाल, निवासी ग्राम राजापुरवा, पोस्ट कुसुम खोर, थाना एवं जनपद कन्नौज। (14) संदीप कश्यप पुत्र रामनारायण, निवासी ग्राम भैंसामऊ, थाना बख्शी का तालाब, जनपद लखनऊ। (15) ए.बी. जॉर्ज पुत्र स्वर्गीय के. जॉर्ज, निवासी तुलसीदास वार्ड, इंद्रा मोहन नगर, थाना दमोह देहात, जनपद दमोह, मध्य प्रदेश। (16) निशांत रूल वाल्टर पुत्र हैरिस दीपक वाल्टर, निवासी मोहल्ला एस.एच. 26, वैशाली नगर, दमोह खास, थाना दमोह देहात, जनपद दमोह, मध्य प्रदेश। (17) दिल बहादुर थापा पुत्र स्वर्गीय खरक बहादुर थापा, निवासी 647 बी/एच 289, वार्ड संख्या 1, जानकीपुरम गार्डन-II, थाना जानकीपुरम, जनपद लखनऊ। (18) अमरपाल राणा पुत्र शंभूलाल, निवासी ग्राम कुम्हरावां, थाना महंगवां, जनपद लखनऊ। (19) यूनुस लॉयल पुत्र स्वर्गीय जियालाल, निवासी 3A एयरफोर्स मोहल्ला, देवीगंज, थाना चकेरी, कानपुर।

थाना: सिधौली, जनपद सीतापुर

एफआईआर संख्या: 334/2024

धाराएँ: उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 5(1) एवं 3।

शिकायतकर्ता: अभिषेक

घटना: अभियुक्तों के अनुसार, 12/12/2024 को ग्राम कटसरिया में लगभग 25–30 पादरियों का एक प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा था। उसी दौरान पुलिस वहाँ पहुँची और सात लोगों को गिरफ्तार कर थाना ले गई। पुलिस ने 71 पृष्ठों की एक प्रशिक्षण पुस्तिका भी जब्त कर ली। आरोप है कि पुलिस ने अशोक कुमार और बलराम को मुठभेड़ में मार देने की धमकी दी।

अगले दिन सभी सातों को पुलिस अधीक्षक (एस.पी.), सीतापुर के कार्यालय ले जाया गया। वहाँ आरोप है कि अपराध शाखा के विक्रम सिंह तथा स्वयं पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्रा ने उनके साथ मारपीट की। अभियुक्तों का कहना है कि उन्हें जबरन यीशु मसीह के विरुद्ध अपशब्द बोलने के लिए विवश किया गया। उनसे “हलेलूया” (Hallelujah) बोलने के लिए कहा जाता था और जब वे ऐसा कहते, तब भी उन्हें पुनः पीटा जाता था।

आरोप है कि अनिल कुमार के पैर पर इतनी बुरी तरह प्रहार किया गया कि उन्हें गंभीर चोट लगी, जो बाद में घाव में बदल गई। उनके अनुसार अब वह घाव कैंसर का रूप ले चुका है और उसके उपचार पर उन्हें काफी धन खर्च करना पड़ रहा है।

वर्तमान स्थिति: अनिल कुमार को 04/01/2025 को जमानत मिली। अंकित रावत को 07/01/2025 को जमानत मिली। अशोक कुमार, अनुराग भारती, बलराम, रामपाल तथा सुनील को 09/01/2025 को जमानत मिली। मनीषा सिंह को 30/01/2025 को जमानत मिली। चेंदा दुक्पा को 12/03/2025 को जमानत मिली। निकसन बक्श तथा संदीप कश्यप को 17/03/2025 को जमानत मिली। आबिएल बक्श, राम पदारथ यादव, कृष्ण पाल उर्फ समर्पण, ए.बी. जॉर्ज, निशांत रूल वाल्टर, दिल बहादुर थापा, अमरपाल राणा तथा यूनुस लॉयल को 02/04/2025 को अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा जमानत प्रदान की गई।


मामला 14

आरोपी: (1) किशोर पुत्र भिखा, (2) रिंकी पत्नी किशोर, दोनों निवासी बौरूमऊ, मड़ियांव, लखनऊ, (3) प्रीति पत्नी मुकेश, निवासी सरमेन, जामो, अमेठी, (4) कल्पी पुत्री कमता प्रसाद, निवासी मुबारकपुर, जगदीशपुर, अमेठी, (5) निशा पुत्री रामनाथ, निवासी पूरे राधिका तिवारी का पुरवा, मजरे राम बख्शगढ़, जामो, अमेठी, (6) पुष्पा देवी पुत्री स्वर्गीय हरिशंकर, निवासी यूपीएसआईडीसी कॉलोनी, करौली, अमेठी।

थाना: जगदीशपुर, जनपद अमेठी

एफआईआर संख्या: 0067, दिनांक: 9/3/25

धाराएँ: उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 एवं 5(1)

शिकायतकर्ता: अश्वनी पांडेय

घटना: आरोपियों के कथन के अनुसार, दिनांक 9/3/25 को एक किराए के मकान में संचालित चर्च में प्रार्थना सभा चल रही थी। उसी दौरान लगभग 150–200 लोग, जो दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों से संबंधित बताए गए हैं, वहाँ आए और हंगामा करने लगे। उन्होंने परिसर में तोड़फोड़ भी की। इस घटना के दौरान किशोर की संपत्ति तथा उसकी कार को नुकसान पहुँचा।

पुलिस को बुलाया गया। इसके बाद किशोर, रिंकी तथा अन्य चार महिला आरोपियों को पुलिस थाने ले जाया गया। आरोप है कि किशोर के साथ मारपीट की गई। उस समय रिंकी लगभग दो माह की गर्भवती थीं। दिनांक 10/3/25 को सभी छह आरोपियों को जेल भेज दिया गया। जेल में रहते हुए रिंकी का गर्भपात हो गया। लगभग एक माह जेल में रहने के बाद सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

इसके बाद 23/8/25 को किशोर को बिहार के गया स्थित एक होटल से पुनः गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उसके पास से एक चोरी का मोबाइल फोन बरामद दिखाया गया। दिनांक 26/8/25 को रेलवे पुलिस उसे वाराणसी लाई, जहाँ उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

वर्तमान स्थिति: लगभग 25 दिन और जेल में बिताने के बाद किशोर को जमानत मिल गई है और वह वर्तमान में जमानत पर रिहा है।


मामला 15

आरोपी: विजय कुमार, पुत्र लालजी, आयु 42 वर्ष, निवासी परमंदापुर, पोस्ट साजोइन, जिला वाराणसी।

थाना: जंसा, वाराणसी

एफआईआर संख्या: 0017, दिनांक: 23/01/2026

धाराएँ: उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 5(1) एवं 3।

शिकायतकर्ता: अमन सेठ, जिला संचार प्रमुख, विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी), वाराणसी।

घटना: विजय कुमार के कथन के अनुसार, वे ग्रामीण क्षेत्रों में “पास्टर यूनिटी” का संचालन करते थे। उनके साथ सात जिलों में प्रत्येक जिले से लगभग 25 पास्टर जुड़े हुए थे।

4 जनवरी 2026 को पास्टर रवि जोसेफ ने हरहुआ, वाराणसी में क्रिसमस के बाद का एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें बच्चों को उपहार वितरित किए जा रहे थे। इसी दौरान हिन्दुत्व संगठनों के सदस्य वहाँ पहुँच गए और कार्यक्रम को रुकवा दिया। विजय कुमार उस समय रवि जोसेफ से फोन पर संपर्क में थे। पुलिस ने रवि जोसेफ का मोबाइल नंबर लेकर विजय कुमार का नंबर निगरानी (सर्विलांस) पर लगा दिया। थाना बड़ागाँव की पुलिस ने रवि जोसेफ, उनके पुत्र एनोस तथा दो अन्य व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया।

5 जनवरी को विजय कुमार दिल्ली चले गए। लगभग एक सप्ताह बाद लौटकर वे चंदौली और फिर लखनऊ गए। 11 जनवरी को उनका एक सड़क दुर्घटना में एक्सीडेंट हो गया, जिससे उनका दायाँ हाथ टूट गया और उस पर प्लास्टर चढ़ा दिया गया। वे घर पर आराम कर रहे थे।

20 जनवरी को शाम लगभग 4 बजे पुलिस उनके घर पहुँची। पुलिस ने उनकी पत्नी से पूछा कि क्या यह विजय कुमार का घर है। यह पुलिस थाना बड़ागाँव की थी, जबकि विजय कुमार का क्षेत्र थाना जंसा के अंतर्गत आता है। विजय कुमार ने अपना मोबाइल बंद किया और नीचे आकर पुलिस से मिले। पुलिस ने उनसे पूछा कि क्या वे रवि जोसेफ, एनोस तथा 4 जनवरी को गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों को जानते हैं। उनके स्वीकार करने पर पुलिस ने कहा कि रवि जोसेफ से संबंधित मामले में पूछताछ के लिए उन्हें साथ चलना होगा। पुलिस ने उनसे मोबाइल फोन भी साथ लाने को कहा।

उनकी पत्नी ने बहाना बनाया कि दुर्घटना में मोबाइल टूट गया था। इस पर पुलिस ने कहा कि यह झूठ है क्योंकि वे मोबाइल की लोकेशन ट्रैक कर रहे हैं और मोबाइल घर में ही मौजूद है। इसके बाद उनकी बेटी मोबाइल लेकर आई और पुलिस को दे दिया। उनकी पत्नी ने अनुरोध किया कि विजय कुमार को उचित कपड़े पहन लेने दिए जाएँ। उस समय उनका दायाँ हाथ प्लास्टर में था। पुलिस ने उन पर आरोप लगाया कि वे सामाजिक सेवा की आड़ में ईसाइयों की सहायता करते हैं।

विजय कुमार को थाना बड़ागाँव ले जाया गया। वहाँ डीसीपी ने उनसे पूछताछ की। लखनऊ से आए पुलिस अधिकारियों ने भी पूछताछ की। उनसे पूछा गया कि क्या वे लोगों का ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराने के लिए पास्टरों को पैसे देते हैं। पुलिस विशेष रूप से उनके धन के स्रोतों के बारे में जानना चाहती थी। विजय कुमार ने बताया कि वे लोगों के सहयोग से कार्य करते हैं। पुलिस ने उनके व्यक्तिगत बैंक खाते का विवरण भी प्राप्त कर लिया।

चार दिन बाद उन्हें थाना जंसा लाया गया। बड़ागाँव थाने में दो दिनों तक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता नंदलाल मास्टर उनके साथ रहे। वाराणसी के बचाँव क्षेत्र के पास्टर विजय राजदूत भी उनसे थाने में मिलने आए। विजय राजदूत ने विजय कुमार की पत्नी के साथ एडीजी तथा पुलिस आयुक्त से भी मुलाकात की।

जब विजय कुमार को थाना जंसा लाया गया, तो थाना प्रभारी ने उन्हें अपने थाने में रखने से इनकार कर दिया और बड़ागाँव थाने के पुलिसकर्मियों को बिना अधिकार क्षेत्र के विजय कुमार को बड़ागाँव ले जाने पर फटकार लगाई।

इसके बाद बड़ागाँव पुलिस ने वीएचपी से जुड़े अमन सेठ की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि थाना जंसा क्षेत्र के निवासी गुलाब सिंह, पुत्र ब्रह्मदेव सिंह, को ईसाई धर्म अपनाने के लिए ₹40,000 का प्रलोभन दिया गया था। शिकायत के अनुसार, गुलाब सिंह को ₹5,000 पहले ही दिए जा चुके थे तथा धर्म परिवर्तन के बाद ₹35,000 और दिए जाने थे।

विजय कुमार के अनुसार, डीसीपी ने थाना जंसा के एसओ पर दबाव डालकर उन्हें थाने में रखने के लिए मजबूर किया। डीसीपी ने उनसे तंज करते हुए कहा कि वे अनुसूचित जाति (एससी) का लाभ भी लेना चाहते हैं और ईसाई होने का भी।

24 जनवरी (पाँचवें दिन) को उपर्युक्त शिकायत के आधार पर उन्हें जेल भेज दिया गया। वे एक महीने तक जेल में रहे। उनके अनुसार, पहले 15 दिनों तक उन्हें प्रताड़ित किया गया। उन्हें बैरक संख्या 10 में रखा गया, जिसे वे वसूली (उगाही) के लिए कुख्यात बताते हैं। भोजन में उन्हें पतली दाल, रोटी और चावल दिया जाता था। 15 दिनों के बाद उनकी बैरक बदल दी गई।

उन्होंने बताया कि इससे पहले वे दो महीने तक केंद्रीय कारागार में सामाजिक सेवा कर चुके थे, जहाँ उन्होंने बंदियों को साबुन, तेल, बिस्कुट आदि उपलब्ध कराए थे।

विजय कुमार के अनुसार, थाना जंसा के प्रभारी ने उनसे अन्य पास्टरों से परिचय कराने के लिए कहा ताकि उनसे धन उगाही की जा सके। इस बीच, जिन दो व्यक्तियों—अजय और धर्मेंद्र—से उनका नियमित संपर्क था, उनमें से अजय को भी उनकी गिरफ्तारी के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।

विजय कुमार का कहना है कि दो महीनों के दौरान वे शारीरिक, मानसिक तथा आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गए। उनके घर पर होने वाली प्रार्थना सभाएँ बंद हो गईं। अब वे लोगों से केवल व्यक्तिगत रूप से मिलते हैं। हालांकि, उनका अन्य सामाजिक कार्य अभी भी जारी है।

वर्तमान स्थिति: 28 फरवरी को उन्हें जमानत मिल गई और अगले दिन रिहा कर दिया गया। अभी तक उन्हें न्यायालय से कोई समन प्राप्त नहीं हुआ है।


मामला 16

अभियुक्त: (1) धीरज सिंह पुत्र सुभाष सिंह, निवासी गौरहटा, खानपुर, जनपद गाज़ीपुर, (2) राजेश मौर्य पुत्र स्वर्गीय सचू मौर्य, (3) कमलेश कुमार पुत्र भगेलू राम, दोनों निवासी इटवा, सकलडीहा, जनपद चंदौली, (4) गुड्डू पुत्र गिरजा उर्फ करिया, निवासी नेवादा, चितईपुर, काशी, वाराणसी, (5) दिनेश कुमार पटेल पुत्र मोतीलाल पटेल, निवासी पहड़िया गणपत नगर, सारनाथ, वरुणा, वाराणसी, (6) अजीत कुमार पुत्र राजेन्द्र राम, आयु 25 वर्ष, निवासी ग्राम निगुरा, थाना धनापुर, जनपद चंदौली

थाना: सकलडीहा, जनपद चंदौली

एफ.आई.आर. संख्या: 0145, दिनांक: 09/07/2026

बरामदगी: बाइबल की 7 प्रतियाँ, 50 धार्मिक पुस्तकें, 200 पर्चे

धाराएँ: उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 5(1) एवं 3

शिकायतकर्ता: भूपेन्द्र कुमार निषाद, थाना प्रभारी, थाना सकलडीहा, चंदौली

घटना: पुलिस को किसी मुखबिर से सूचना मिली कि धीरज सिंह ग्राम इटवा में कमलेश कुमार के घर पर कुछ लोगों का धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। कोई भी स्थानीय व्यक्ति शिकायतकर्ता बनने के लिए तैयार नहीं हुआ, इसलिए थाना प्रभारी ने स्वयं प्राथमिकी दर्ज कराई।

अजीत सिंह (वास्तव में अभियुक्त अजीत कुमार) के पिता, जो अनुसूचित जाति वर्ग से हैं, एक दुर्घटना में पैर टूटने से घायल हो गए थे। अजीत उन्हें अस्पताल ले गया। बाद में उसे एक फोन आया, जिसमें उसके पिता के स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना सभा में आने को कहा गया। वह कमलेश के घर आयोजित प्रार्थना सभा में शामिल होने चला गया। इसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई में उसकी मोटरसाइकिल भी अन्य वाहनों के साथ जब्त कर ली गई।

अजीत ईंट ढोने का काम करता था और अत्यंत गरीब परिवार से है। थाना धनापुर में हुए एक विवाद के कारण उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई। उस पर यह आरोप भी लगाया गया कि वह लोगों को पैसे देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन देता था। वर्तमान में अजीत जेल में है। उसका परिवार मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। क्षेत्र के उच्च जाति के लोग इस बात से नाराज़ बताए जाते हैं कि अधिकांश अनुसूचित जाति के लोग यीशु मसीह को स्वीकार करने के बाद उनके पास नहीं आते।

वर्तमान स्थिति: धीरज, गुड्डू और दिनेश को 29/07/2026 को जमानत मिल गई तथा कमलेश को 01/08/2026 को जमानत प्राप्त हुई।


मामला 17

अभियुक्त: (1) चन्द्रभान पुत्र नन्दकिशोर, (2) आरती पत्नी चन्द्रभान, (3) सीमा पत्नी मनोज, तीनों निवासी ग्राम बरसावा, मोहनलालगंज, दक्षिण लखनऊ, (4) सुबला पत्नी डैनियल, (5) डैनियल पुत्र सुन्दरम, दोनों निवासी ग्राम हरिकांशगढ़ी, मोहनलालगंज, दक्षिण लखनऊ, (6) शीला पत्नी अजय रावत, (7) अजय रावत पुत्र स्वर्गीय मेधेलाल

थाना: मोहनलालगंज, दक्षिण लखनऊ

एफ.आई.आर. संख्या: 0272, दिनांक: 23/07/2026

धाराएँ: भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराएँ 352 एवं 351(2), तथा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धाराएँ 3, 5(1) एवं 11

शिकायतकर्ता: अमित कुमार

घटना: शिकायतकर्ता का आरोप है कि अभियुक्तों ने उसका ईसाई धर्म में धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया। जब उसने उनसे अपने गाँव के लोगों का धर्म परिवर्तन न कराने को कहा, तो उसे धमकी दी गई। इसके बाद अमित कुमार ने पुलिस को सूचना दी।

वर्तमान स्थिति: सभी अभियुक्त वर्तमान में जेल में हैं।

प्रलेखित मामलों से यह संकेत मिलता है कि इस अधिनियम का प्रयोग केवल बलपूर्वक या धोखाधड़ी से कराए गए धर्म परिवर्तन के मामलों तक सीमित नहीं रहा है। अनेक मामलों में शांतिपूर्ण प्रार्थना सभाओं के बाद, विधि-विरुद्ध धर्म परिवर्तन के स्पष्ट प्रमाण के अभाव में भी आपराधिक कार्यवाही प्रारम्भ की गई प्रतीत होती है। इसके परिणामस्वरूप लंबी आपराधिक कार्यवाही, हिरासत, धार्मिक उपासना में व्यवधान तथा धार्मिक स्वतंत्रता के प्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव (चिलिंग इफेक्ट) देखने को मिला है।

मानवाधिकार संबंधी चिंताएँ

प्रलेखित मामलों से निम्नलिखित अधिकारों के संबंध में चिंताएँ उत्पन्न होती हैं:

· धर्म की स्वतंत्रता (संविधान का अनुच्छेद 25);

· संगठन बनाने की स्वतंत्रता;

· मनमानी गिरफ्तारी;

· विचारण (ट्रायल) से पूर्व लंबी अवधि तक हिरासत;

· विधिसम्मत प्रक्रिया (ड्यू प्रोसेस);

· हिरासत में हिंसा;

· धार्मिक अल्पसंख्यकों को डराना-धमकाना;

· शांतिपूर्ण धार्मिक आचरण पर प्रतिकूल (चिलिंग) प्रभाव।

यह रिपोर्ट यह निष्कर्ष नहीं निकालती कि विधि-विरुद्ध धर्म परिवर्तन का प्रत्येक आरोप निराधार है। तथापि, यहाँ प्रलेखित घटनाओं में बार-बार सामने आए तथ्यात्मक स्वरूप चयनात्मक प्रवर्तन, प्रक्रियागत निष्पक्षता तथा वर्तमान प्रवर्तन पद्धतियों की धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी संवैधानिक गारंटियों के साथ संगतता पर गंभीर प्रश्न उठाते हैं।

सिफारिशें

उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह:

· उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के क्रियान्वयन की समीक्षा करे;

· यह सुनिश्चित करे कि पुलिस केवल उन्हीं मामलों में प्राथमिकी दर्ज करे जहाँ कानून में परिभाषित बल, धोखाधड़ी या दबाव के विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध हों;

· किसी संज्ञेय अपराध की युक्तिसंगत आशंका के अभाव में शांतिपूर्ण प्रार्थना सभाओं में पुलिस हस्तक्षेप पर रोक लगाए;

· इस रिपोर्ट में उल्लिखित हिरासत में हिंसा एवं पुलिस दुराचार के आरोपों की जाँच कराए;

· जहाँ गिरफ्तारियाँ अवैध पाई जाएँ, वहाँ पीड़ितों को उचित क्षतिपूर्ति प्रदान करे;

· अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने हेतु स्पष्ट कार्यान्वयन संबंधी दिशा-निर्देश जारी करे।

भारत सरकार को चाहिए कि वह:

· यह सुनिश्चित करे कि धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों का प्रवर्तन संविधान के अनुच्छेद 14, 21 एवं 25 तथा भारत के अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों के अनुरूप हो।

न्यायपालिका को चाहिए कि वह:

· विधि-विरुद्ध धर्म परिवर्तन के आरोपों से संबंधित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करे;

· तृतीय पक्ष द्वारा दर्ज कराए गए मामलों में अभियोजन के साक्ष्य आधार की सावधानीपूर्वक समीक्षा करे।

हालाँकि, गिरफ्तारियों और अभियोजन की प्रलेखित प्रवृत्ति को देखते हुए, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) तथा सोशलिस्ट लॉयर्स फ़ोरम उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 तथा उसके वर्ष 2024 के संशोधन को निरस्त किए जाने की अनुशंसा करते हैं।

तैयारकर्ता: संदीप पाण्डेय प्रधान महासचिव, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) फोन: 0522-2355978, 3564437 ईमेल: ashaashram@yahoo.com


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