दिनांकः 27 जुलाई, 2026
यह बात समझ से परे है कि रामपुर विकास प्राधिकरण् हजारों छात्रों को शिक्षा दे रहे मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को पूरी तरह से जमींदोज करने का इरादा रखता है, वह भी देश के ऐसे क्षेत्र में जहाँ शैक्षणिक बुनियादी ढांचे की भारी कमी है और अधिकांश लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक पहुँच अभी भी एक सपना बना हुआ है। यह इस बात का अनगिनत उदाहरणों में से केवल एक उदाहरण है कि भाजपा अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति प्रतिशोध की भावना और देश की मुस्लिम आबादी के प्रति अपनी अवहेलना में किस हद तक गिर सकती है।
यदि विश्वविद्यालय परिसर में अनधिकृत निर्माण हैं, तो मूल्यवान शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को नष्ट किए बिना मुद्दे को हल करने के कई तरीके हैं। रा.वि.प्रा. जैसे विकास प्राधिकरण आमतौर पर जुर्माना और कम्पाउंडिंग फीस लगाकर अनधिकृत निर्माणों को नियमित करते आए हैं। गिराने की यह जल्दबाजी स्पष्ट रूप से इस पूरी प्रक्रिया के राजनीतिक रूप से प्रेरित होने के स्वभाव को दर्शाती है।
यदि विश्वविद्यालय के कामकाज में इतनी गंभीर अनियमितताएं थीं, तो यह पहली बार में मान्यता और विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करने में कैसे सफल हुआ? वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था शैक्षणिक संस्थानों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समूहों को सेवाएं देने वाले संस्थानों को निशाना बनाने की एक मानसिकता दिखाती है। इससे पहले, भाजपा और उसके समर्थकों ने जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी उत्कृष्ट चिकित्सा संस्थान में एमबीबीएस कार्यक्रम के छात्रों के पूरे बैच का प्रवेश रद्द करा दिया था, क्योंकि प्रवेश पाने वाले 50 में से 42 छात्र मुस्लिम थे। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि संस्थान को हिंदू भक्तों से दान मिलता है, इसलिए उसे हिंदू छात्रों के लिए सीटें आरक्षित करनी चाहिए। हालांकि, जैसा कि जम्मू व कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने स्पष्ट किया था, संस्थान को केंद्र शासित प्रदेश सरकार से जमीन मिली थी और सालाना बजट भी मिलता है। आखिरकार, नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा इसके संचालन में “गंभीर कमियां” पाए जाने के बाद संस्थान का एमबीबीएस कार्यक्रम बंद कर दिया गया। सरकार अपनी राजनीतिक प्रतिशोध और शक्ति के दुरुपयोग को संस्थागत कामकाज के रूप में पेश करती है।
हाल ही में सूचना के अधिकार से खुलासा हुआ है कि पिछले पांच वर्षों में देश में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की संख्या में 18,727 की कमी आई है। इस वर्ष मई में प्रकाशित नीति आयोग की एक रिपोर्ट से पता चला है कि पिछले 10 वर्षों में स्कूल में नामांकित कुल छात्रों की संख्या में 2.26 करोड़ की गिरावट आई है। जहाँ दुनिया के अधिकांश विकासशील देश सार्वभौमिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए काम कर रहे हैं, वहीं हम पीछे की ओर जा रहे हैं। भाजपा जानती है कि देश के आम और हाशिए पर स्थित लोगों तक पहुँचने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, जिससे वे राजनीतिक और सामाजिक संरचनाओं पर सवाल उठाने और आलोचना करने में सक्षम हो सकें, हिंदुत्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है, जो एक ऐसी विचारधारा है जो झूठ, उत्पीड़न और नफरत पर फलती-फूलती है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडीया) मांग करती है कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को अपना संचालन जारी रखने की अनुमति दी जाए ताकि केवल राजनीतिक द्वेष और दुर्भावना के कारण हजारों छात्रों की शिक्षा से समझौता न हो।
रामेन्द्र यादव, 8545072646
अमित मौर्य, 9793125579
राजीव यादव, 8210437705
एड. इमरान अहमद, 8887508552
संदीप पाण्डेय, 0522 2355978, 3564437


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