2 दिवसीय ऑनलाइन सोशलिस्ट कांफ्रेंस (17 – 18 मई 2020) के प्रस्ताव

2 दिवसीय ऑनलाइन सोशलिस्ट कांफ्रेंस (17 – 18 मई 2020) के प्रस्ताव

समाजवादियों का मानना है कि आजका सच पूंजीवादी नीतियों का परिणाम है। देश का जनसाधारण सरकार और सरकारी नीतियों से मोहभंग के दौर में है। नए समाधानों की तलाश का समय आ गया है। ‘सबको रोटी – सबको काम’ का नारा देशव्यापी हो रहा है।

35 वक्ताओं के सम्बोधन के साथ 2 दिवसीय ऑनलाईन सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस सम्पन्न, ऑनलाइन 75 हज़ार समाजवादी हुए शामिल

35 वक्ताओं के सम्बोधन के साथ 2 दिवसीय ऑनलाईन सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस सम्पन्न, ऑनलाइन 75 हज़ार समाजवादी हुए शामिल

आज़ादी के आंदोलन और समाजवादी आंदोलन की विरासत के अनरूप समाजवादी व्यवस्था कायम करने का लिया संकल्प. प्रवासी मज़दूरों, किसानों, स्वस्थ्य, बेरोजगारी एवम पर्यावरण के मुद्दों पर.

कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के स्थापना दिवस 17 मई 1934 पर विशेष: हम में से समाजवादी कौन है?

कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के स्थापना दिवस 17 मई 1934 पर विशेष: हम में से समाजवादी कौन है?

अरुण कुमार त्रिपाठी | यह दौर है जब समाजवादी 1934 की तरह एक मंच पर इकट्ठा हों और उन मूल्यों को संजोएं जिन्हें पूंजीवाद और उसकी विकृतियों से उत्पन्न हुई महामारी ने नष्ट करने का प्रयास किया है। यह समय मजदूरों और किसानों के दर्द को समझने और उनके एजेंडे की वापसी का है।

किसान मजदूर ही बन सकते हैं परिवर्तन का हरावल दस्ता

किसान मजदूर ही बन सकते हैं परिवर्तन का हरावल दस्ता

दिनेश सिंह कुशवाह | आज पूरा देश संकट में है और ऐसे में तमाम समाजवादी विचारों से जुड़े राजनीतिक कार्यकर्ताओं को इस बात पर विचार करना चाहिए कि आज यदि डॉक्टर लोहिया जैसा नेतृत्व होता तो वह इस सरकार की जनविरोधी, मजदूर-किसान विरोधी नीतियों का विरोध कैसे करता.

कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के स्थापना दिवस पर विशेष लेख: स्थापना काल से ही समाजवादी पत्र-पत्रिकाओं और लेखकों ने वैचारिक कार्यकर्ता तैयार करने के लिए बड़ा काम किया

कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के स्थापना दिवस पर विशेष लेख: स्थापना काल से ही समाजवादी पत्र-पत्रिकाओं और लेखकों ने वैचारिक कार्यकर्ता तैयार करने के लिए बड़ा काम किया

रामस्वरूप मंत्री | कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना के समय से ही इस आंदोलन के बड़े नेताओं का मानना था कि विचार वान कार्यकर्ता ही देश में संघर्ष और कसमता की राजनीति कर सकता है। इसलिए उन तमाम नेताओं ने विचार फैलाने के लिए लेखन को भी अपने कर्मो में शामिल किया।