Village/town committee: If 20 primary members in a village/town are enrolled and 1 active member, can form committee which will meet once in a week/fortnight to decide about activities. There will be one president and one secretary and five members.A block/tehsil committee can be formed when primary units of the party are formed in at least 5 % of the villages. The committee will have one president, one secretary, one treasurer and four members. It will meet at least once in a month. Yearly meeting-of all primary members of the block/tehsil be organized.

District Committee: This can be constituted if at least two block/tehsil committees are formed in the district with one president, one secretary one treasurer and 21 members. Will meet at least once in two months and one yearly convention of all members to be convened to chalk out activities of the party. Note-In case of metro cities or one having municipal corporation, it will be deemed as a separate district.

State Committee: A state committee can be formed when at least five district committees are formed. There will be one president, three vice- presidents, one general secretary, three secretaries, one treasurer and 31 members. The committee will have power to appoint ad hoc district committees where the party structure does not exist. The State committee will meet once in three months and organize yearly convention of members of district committees. The office bearers will be elected at a by yearly convention The committee can print receipt books for collecting funds and enrolment of members and will arrange to keep proper accounts and pay to the central office its share.

National Council: Three members of the National convention will be elected by every properly constituted district. Number of members of . the National Convention will be 5% of the total membership of the party. The National Council will meet once in two years and elect one president, and 3 general secretaries and 51 members of the national committee. Other office-bearers will be elected by the national committee.This will be apex body of the party which alone can effect amendments to the constitution or decide about dissolution or merger of the party.A special meeting of the National Convention can be convened if so decided by the national committee.Discipline Committee. The council will appoint a discipline committee of 3 to 5 members to deal with matters of indiscipline. An appeal can be preferred to the National Committee against the decision of the discipline committee.The president will preside over the meetings of the national convention and national committee and general secretary will convene, after consultation with the president, meetings of the national convention and national committees.

National committee: Will consist of the president 5 vice presidents,3 general secretaries and 1 treasure and 51 members elected by the national council.

National Convention: The committee will appoint up to five vice- presidents four secretaries one treasurer. The office-bears will be responsible for implementing decisions of the national convention and national committee, maintain central office and maintain accounts of the funds.The national committee will meet once in six months.The responsibilities and powers of the National committee will be :

– To implement the decisions and programs as decided by the national committee and the national council.

– To constitute a Parliamentary Board with the President and the general secretary as such plus 7 to 9 members and will be responsible for selection of candidates for state legislatures and. parliament and other related matters.

– To decide about fund distribution between different committees of the party,

– To make arrangements about the running of the central office

– To frame rules including about elections at all levels in the party

– To arrange about opening and operation of bank account and acquire and hold property

– To deal with the Election Commission of India regarding party registration, etc. and submit a copy of IT return to the Election Commission within sixty days after expiry of financial years.

One Response to “STRUCTURE”

  1. आरक्षण क्यूँ ?

    नवभारत टाइम्स के ब्लॉग पर आरक्षण के विषय में कुछ लेख पढ़ने को मिले और उन्ही लेखों ने मुझे ये लेख लिखने को प्रेरित किया , जब बात आरक्षण की होती है तो सब भारतीय संविधान द्वारा अनुसूचित-जाती, जनजाति एवं अतिपिछड़ा वर्ग को मिले उस आरक्षण या विशेष अधिकारों की ही बात करतें हैं जिन्हें लागू हुए मुश्किल से 60 वर्ष ही हुए हैं ,कोई उस आरक्षण की बात नही करता जो पिछले 3000 वर्षों से भारतीय समाज में लागू थी

    जिसके कारण ही इस आरक्षण को लागू करने की आवश्यकता पड़ी आज ”भारतीय गणराज्य का संविधान” नामक संविधान, जिसका हम पालन कर रहें है जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ उससे पहले जो संविधान इस देश में लागू था जिसका पालन सभी राजा-महाराजा बड़ी ईमानदारी से करते थे उस संविधान का नाम था ”मनुस्मृति”

    आधुनिक संविधान के निर्माता अंबेडकर ने सबसे पहले 25 दिसंबर 1927 को हज़ारों लोगों के सामने इस ”मनुस्मृति” नामक संविधान को जला दिया ,क्यूंकी अब इस संविधान की कोई आवश्यकता नही थी भारतीय संविधान में आरक्षण का प्रावधान इसलिए दिया गया क्यूंकी इस देश की 85 प्रतिशत शूद्र जनसंख्या को कोई भी मौलिक अधिकार तक प्राप्त नही था

    ,सार्वजनिक जगहों पर ये नही जा सकते थे मंदिर में इनका प्रवेश निषिध था सरकारी नौकरियाँ इनके लिए नहीं थी , ये कोई व्यापार नही कर सकते थे , पढ़ नहीं सकते थे , किसी पर मुक़दमा नही कर सकते थे , धन जमा करना इनके लिए अपराध था , ये लोग टूटी फूटी झोपड़ियों में, बदबूदार जगहों पर, किसी तरह अपनी जिंदगिओं को घसीटते हुए काट रहे थे और यह सब ”मनुस्मृति” और दूसरे हिंदू धर्मशास्त्रों के कारण ही हो रहा था कुछ उदाहरण देखिए-

    1.संसार में जो कुछ भी है सब ब्राह्मानो के लिए ही है क्यूंकी वो जन्म से ही श्रेष्ठ है(मनुस्मृति 1/100)

    2.स्वामी के द्वारा छोड़ा गया शूद्र भी दासत्व से मुक्त नही क्यूंकी यह उसका कर्म है जिससे उसे कोई नही छुड़ा सकता (8/413)

    3.यदि कोई नीची जाती का व्यक्ति ऊँची जाती का कर्म अपना ले तो राजा उसे देश निकाला देदे (10/95)

    4.बिल्ली, नेवला चिड़िया मेंढक, गढ़ा, उल्लू, और कौवे की हत्या में जितना पाप लगता है उतना ही पाप शूद्र (अनुसूचितजाती, जनजाति एवं अतिपिछड़ा वर्ग) की हत्या में है (मनुस्मृति 11/131) 

    5.शूद्र का धन ब्राह्मण निर्भीक होकर छीन सकता है क्यूंकी उसको धन रखने का अधिकार नही (8/416)

    6. सब वर्णों की सेवा करना ही शूद्रो का स्वाभाविक कर्तव्य है (गीता,18/44)

    7. जो अच्छे कर्म करतें हैं वे ब्राह्मण ,क्षत्रिय वश्य, इन टीन अच्छी जातियों को प्राप्त होते हैं जो बुरे कर्म करते हैं वो कुत्ते, सूअर, या शूद्र जाती को प्राप्त होते हैं (छान्दोन्ग्य उपनिषद् ,5/10/7)

    8. पूजिए विप्र ग्यान गुण हीना, शूद्र ना पूजिए ग्यान प्रवीना,(रामचरित मानस)

    9.ब्राह्मण दुश्चरित्र भी पूज्‍यनीए है और शूद्र जितेन्द्रीए होने पर भी तरास्कार योग्य है (पराशर स्मृति 8/33)

    10. धार्मिक मनुष्या इन नीच जाती वालों के साथ बातचीत ना करें उन्हें ना देखें (मनुस्मृति 10/52)

    11. धोबी , नई बधाई कुम्हार, नट, चंडाल, दास चामर, भाट, भील, इन पर नज़र पद जाए तो सूर्य की ओर देखना चाहिए इनसे बातचीत हो जाए तो स्नान करना चाहिए (व्यास स्मृति 1/11-13)

    12. अगर कोई शूद्र वेद मंत्र सुन ले तो उसके कान में धातु पिघला कर डाल देना चाहिए- गौतम धर्म सूत्र 2/3/4….

    ये उन असंख्य नियम क़ानूनों के उदाहरण मात्र थे, जो आज़ाद भारत से पहले देश में लागू थे ये अँग्रेज़ों के बनाए क़ानून नहीं थे ये हिंदू धर्म द्वारा बनाए क़ानून थे जिसका सभी हिंदू राजा पालन करते थे प्रारंभ में तो इन्हें सख्ती लागू करवाने के लिए सभी राजाओं के ब्राह्मणों की देख रेख में एक विशेष दल भी हुआ करता था

    इन्ही नियमों के फलस्वरूप भारत में यहाँ की विशाल जनसमूह के लिए उन्नति के सभी दरवाजे बंद कर दिए गये या इनके कारण बंद हो गये, सभी अधिकार, या विशेष-अधिकार, संसाधन, एवं सुविधायें कुछ लोगों के हाथ में ही सिमट कर रह गईं, जिसके परिणाम स्वरूप भारत गुलाम हुआ 

    भारत की इस गुलामी ने उन करोड़ों लोगों को आज़ादी का अवसर प्रदान किया जो यहाँ शूद्र बना दिए गये थे , इस तरह धर्मांतरण का सिलसिला शुरू हुआ , बड़ी संख्या में लोगों ने इस्लाम ईसाइयत को अंगीकार किया , अंग्रेज़ो के शासन काल में उन्नीस्वी सदी के प्रारंभ से यहाँ पुनर्जागरण काल का उदय हुआ जिसके नायक यहीं के उच्च वर्गिए लोग थे जो अँग्रेज़ी शिक्षा, संस्कृति से प्रभावित हो कर देश में बदलाव लाने को प्रयत्नशील हुए ,

    सती प्रथा को समाप्त किया गया स्त्री शिक्षा के द्वार खोले गये , शूड्रों को नौकरियों में स्थान दिया जाने लगा और कितनी ही क्रूर प्रताओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया ,कई परिवर्थन्शील ,संगठनों का उदय हु

    Reply

Leave a Reply to Anonymous Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *