सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के नीरज कुमार हैं ओबरा विधान सभा क्षेत्र (220) बिहार से उम्मीदवार

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चुनाव चिन्ह: बैटरी टार्च

बिहार के ओबरा विधान सभा क्षेत्र (220), जिला औरंगाबाद, से सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के चुनाव प्रत्याशी हैं नीरज कुमार. नीरज केमिस्ट्री से स्नातकोत्तर होने के साथ-साथ सामाजिक रूप से लम्बे अरसे से सक्रीय रहे हैं. ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ में उनकी पूर्ण आस्था है और इसीलिए उनका मानना है कि समाज में सभी लोगों को परिवार की तरह मिलजुल पर सौहार्द के साथ रहना चाहिए. परिवार में जब हम एक दुसरे के दर्द के प्रति संवेदनशील होते हैं तो समाज में ऐसे क्यों नहीं रह सकते?

समाज में व्याप्त असमानता उनके लिए एक अहम् मुद्दा है. सरकारी विकास योजनाओं का लाभ समाज में दबे हुए तबकों और हाशिये पर रह रहे समुदाय तक नहीं पहुँच रहा है जिसकी चंद वजह असमानता और भ्रष्टाचार हैं.

ग्राम स्तर से लेकर सरकार के उच्च-स्तर तक भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है. जब तक भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगेगा, तब तक विकास और समानता के कार्य कुंठित रहेंगे.

नीरज कुमार का कहना है कि एक तरफ तो शिक्षा का निजीकरण हो रहा है और दूसरी ओर सरकारी शिक्षा प्रणाली बंदरबांट की तरह व्यवस्थित है जिसकी वजह से अधिकतर गरीब परिवार के बच्चे शिक्षा से वंचित हैं. शिक्षा में भी भ्रष्टाचार व्याप्त है. जब तक सामान्य शिक्षा प्रणाली लागु नहीं होगी जिससे कि अमीर गरीब सबके बच्चे एक से स्कूल में जाएँ और एक सी शिक्षा प्राप्त करें, तब तक असमानता कैसे दूर होगी?

नीरज कुमार, खूब १० एकड़ के खेत में कृषि करते हैं, जिसमें से २ एकड़ खेत पर जैविक खाद से खेती होती है. नीरज का मानना है कि पिछले चंद दशकों में कृषि की हालत बहुत गंभीर हो गयी है और आज के वर्त्तमान परिप्रेक्ष्य में किसान आत्म-निर्भर नहीं रह गया है. उदहारण के तौर पर पहले किसान बीज आदि स्वयं ही संग्रहित करता था, पर अब अधिकांश किसानों को बीज के लिए बहुराष्ट्रीय उद्योग की ओर देखना पड़ता है. पहले एशिया ही था जब हजारों किस्म के बीज होते थे पर अब कुछ संस्थाओं को छोड़ कर जो बीज संग्रहित करते हैं, बाकि सभी किसानों को कंपनियों के बीज की जरुरत है. रासायनिक खाद से भी किसानी आत्म-निर्भर नहीं रह गयी है. अब आवश्यकता है कि किसानों को जैविक खेती करने के लिए पूरा समर्थन मिले.

मजदूर वर्ग से जुड़े मुद्दे भी बहुत अहम् है. यदि गाँव में रोज़गार की संभावनाएं होंगी तब पलायन भी रुक सकेगा.

स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण और दवाओं आदि की तेज़ी से बढती कीमतों ने गरीब पर सबसे अधिक प्रहार किया है. स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त करना और दवाओं आदि की कीमतों पर लगाम लगाना जरुरी है क्योंकि स्वास्थ्य ‘व्यापार’ नहीं है. जरुरी दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को सरकार को हर जरूरतमंद तक पहुचना चाहिए.

फोन: +91-91-998-11295

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