सेना बताए श्रीकांत पुरोहित की बहाली की तैयारी का आधार

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सेना बताए श्रीकांत पुरोहित की बहाली की तैयारी का आधार

सर्वोच्च न्यायालय ने लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को 29 सितम्बर, 2008 मालेगांव बम विस्फोट मामले, जिसमें सात लोगों की जानें गईं और 79 लोग घायल हुए, में जमानत दे दी है। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर व सेवा निवृत मेजर रमेश अपाध्याय भी आरोपी बनाए गए थे।

ये तीनों महाराष्ट्र ए.टी.एस. की जांच में पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे द्वारा दोषी पाए गए थे। हेमंत करकरे की 26 नवम्बर, 2008 को ही मुम्बई पर हुए आतंकी हमले में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में अब आरोपियों के खिलाफ मामले को हल्का किया जा रहा है। साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ तो आरोप वापस ले लिए गए हैं। ले.क. पुरोहित के खिलाफ आरोपों को कमजोर किया जा रहा है। भूतपूर्व मुम्बई पुलिस प्रमुख जुलियो रिबेरो ने कहा है कि यह शर्म की बात है कि भूतपूर्व ए.टी.एस. प्रमुख हेमंत करकरे जैसे ईमानदार अफसर द्वारा की गई जांच पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि भले ही हेमंत करकरे अपना बचाव करने के लिए जीवित न हों पर वे उनका बचाव करेंगे।

लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित अभी सिर्फ जमानत पर छूटें हैं और सेना उनकी बहाली की बात कर रही है। जब 2001 में संसद हमले में दिल्ली वि.वि. के प्रोफेसर सैयद अब्दुर रहमान गिलानी आरोपी बनाए गए थे तो उनकी बहाली तब तक नहीं हुई थी जब तक वे मामले में बरी नहीं हो गए थे। 2016 में कश्मीर पर बयान देने के मामले में फिर गिलानी निलम्बित हुए और अभी तक उनके खिलाफ कोई चार्जशीट न दाखिल होने के बावजूद उनका निलम्बन वापस नहीं लिया गया है। गिलानी तो सिर्फ पढ़ाने का काम करते हैं जबकि सेना तो एक संवेदनशील महकमा है। पुराहित की बहाली यदि होनी भी है तो और ठोक-बजा कर होनी चाहिए।

ले. क. पुरोहित पर गम्भीर आरोप हैं। उन्होंने अभिनव भारत संस्था को पुनर्जीवित किया। यह संस्था न तो भारतीय संविधान को मानती है और न ही भारतीय तिरंगे झण्डे को। पुरोहित की योजना भारत की सरकार को उखाड़ फेकने के लिए इजराइल या नेपाल में निष्कासित सरकार चलाने की थी। पुरोहित के ऊपर सेना के हथियारों को बेचने का व अवैध हथियार खरीदने का भी आरोप है। पुराहित ने सेना में रहते हुए अपने पद का भरपूर दुरुपयोग कर कट्टरपंथी हिन्दुत्ववादी शक्तियों को लाभ पहंुचाने की कोशिश की। वह अतिवादी सोच से ग्रसित असुरक्षित इंसान है। स्पष्ट रूप से देशद्राही व्यक्ति की जमानत पर बहाली का जिस तरह सेना ने स्वागत किया है वह गम्भीर बात है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की बात भी है।

मुम्बई की तलोजा जेल से छूटने के बाद उन्हें सेना के खुफिया विभाग के उस कार्यालय ले जाया गया जहां वे काम करते थे। यह कहा जा रहा है कि उन्हें रोज अपने कार्यालय आना होगा और उन्हें कुछ हल्का-फुल्का जैसे प्रशासनिक काम दिया जा सकता है।

पुरोहित का कहना है कि वे अभिनव भारत की जासूसी करने के लिए अपने उच्च अधिकारियों को बता कर अभिनव भारत के लिए काम कर रहे थे। सवाल है उठता है कि यदि वे वाकई अभिनव भारत की जासूसी कर रहे थे तो उन्होंने मालेगांव बम धमाके के पहले सेना या पुलिस को अगाह कर उस धमाके को होने से रोका क्यों नहीं? यदि वह जासूसी का काम कर रहा था तो उसे आर.डी.एक्स. चुराने की क्या जरूरत थी? जाहिर है पकड़े जाने पर अब वे ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे अपने उच्च अधिकारियों की जानकारी में अभिनव भारत के लिए काम कर रहे थे जबकि हकीकत यह है कि वे मालेगांव बम धमाके की साजिश में ही शामिल थे।

क्या सेना बताएगी कि पुरोहित उसकी सहमति से अभिनव भारत के लिए काम कर रहे थे और क्या उन्होंने सेना की जानकारी में 60 किलोग्राम आर.डी.एक्स. बाहर निकाला था?

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग हरेक देश में जाकर आतंकवाद के खिलाफ बोला है और पाकिस्तान की जमीन से उत्पन्न आतंकवाद पर रोक लगाने की मांग की है। क्या वे बताएंगे कि भारत की भूमि से उत्पन्न होने वाले आतंकवाद के बारे में उनकी क्या राय है? ले.क. पुरोहित बाकी किसी बम विस्फोट करने वाले से कैसे अलग हैं? क्या अपने ही देश के सात लोगों की मौत के लिए उनकी जवाबदेही नहीं तय की जानी चाहिए?

जो लोग ले.क. पुरोहित को सेना का एक बहादुर अफसर बताने की कोशिश कर रहे हैं उनसे पूछा जाना चाहिए कि अपने ही देश में बम विस्फोट करा कर अपने देशवासियों की जानें लेना कहां की बहादुरी व देशभक्ति है? बल्कि देखा जाए तो यह बड़ा कायरता का काम है। दूसरी तरफ हेमंत करकरे जैसे अफसर को जिसने मुम्बई आतंकवादी हमले में अपनी जान तक गवां दी को यह दिखाने की कोशिश करना कि उन्होंने किसी क्षुद्र स्वार्थ के लिए ले.क. पुरोहित व उनके साथियों को फंसाया शहीद पुलिस अफसर के साथ ज्यादती होगी। हेमंत करकरे व श्रीकांत पुरोहित की कोई तुलना ही नहीं की जा सकती। एक ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान दी और दूसरे ने आतंकवादी घटना को अंजाम देकर अपने देश के नागरिकों की जानें लीं।

क्या भारतीय सेना एक आतंकवादी, अराजतकतावादी और हत्यारे की बहाली की तैयारी कर रही है?

लेखकः संदीप पाण्डेय
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